शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

मेरी आँख का काजल....











हमारी आँख का काजल 
तुम्हारी आँख में हो...
ये सोच कर हमने 
अपनी आँखों में 
ढेर सा काजल डाला था !
नहीं ये मालूम था कि 
तुम मुझे इतना रुलाओगे ,
मेरे आँखों के काजल को 
यूँ ही बेबात बहाओगे !
यूँ तो रो रो के धुल गई 
ये आँखे मेरी...!
लेकिन वो काजल भी बह गया 
जो मैं तुम्हारी आँखों में 
लगाना चाहती थी.....
बस...
मुझे उसी का अफ़सोस ज्यादा है !!







5 टिप्‍पणियां:

  1. पूनम जी काजल की कहानी आपकी जुबानी सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम मिलो तो जिंदगी फिर आँख में काजल लगाये ।

    उत्तर देंहटाएं