शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

कोई कह दे ये वाक़या क्या है...








जिंदगी ने जो दी सज़ा क्या है...
हम भी समझें....ये माज़रा क्या है...?

अब वो रहते हमारे पहलू में..
बात बस इतनी सी...ख़ता क्या है..?

हम समझते हैं उसकी मज़बूरी...
अब समझने को कुछ रहा क्या है...?

हुस्न पर यूँ मिटे हैं परवाने...
शम्मा कहती रही...जला क्या है...?
     
होंठ ख़ामोश, आँख नम है ग़र...
हम समझते हैं ज़लज़ला क्या है...?
    
दिल लगाया...सजा मुकर्रर हो...
इश्क़ में और कुछ बचा क्या है...?

नींद आँखों में जब उतर आये...        
ख्वाब का कोई सिलसिला क्या है..?

आप आये तो ये चमन महके....
गुल के खिलने का आसरा क्या है..?

चाँद गुमसुम है शबनमी 'पूनम'...
कोई कह दे ये वाक़या क्या है...?


***पूनम***
2/10/2015


रविवार, 26 अगस्त 2018

समंदर हूँ, कभी सहरा रही हूँ....



समंदर हूँ, कभी सहरा रही हूँ..
तेरी आँखों का रंग गहरा रही हूँ..!

ज़माने ने जिसे देखा नहीं है..
मैं तेरे रू ब रू चेहरा रही हूँ..!

लबों की सुर्खियाँ लबरेज़ शबनम..
गुलों में शहद का कतरा रही हूँ..!

मैं बन कर ख़्वाब रंगी ज़िन्दगी के..
तेरी नज़रों में भी लहरा रही हूँ..!

कभी थी रात की मानिंद 'पूनम'..
अगरचे चाँद को ख़तरा रही हूँ..!

***पूनम***


सोमवार, 29 जनवरी 2018

**दिल में दर्द बसा कर देखो...**





दिल में दर्द बसा कर देखो...
हमसे आँख चुरा कर देखो...!

हार गए तो क्यूँ डरते हो...
खुद पर दाँव लगा कर देखो...!

हाल तुम्हारा बतला देंगे...
हमसे नज़र मिला कर देखो...!

बीती बातें,कल के किस्से...
सब को आज भुला कर देखो...!

पूरा चाँद उतर आएगा...
दामन तो फैला कर देखो...!

ख़्वाबों के सूने आँगन में...
यादों को महका कर देखो...!

तेरा मेरा क्या है रिश्ता...
चाहो तो आजमा कर देखो...!

'पूनम' रात, चमकते तारे...
महफ़िल ए इश्क़ सजा कर देखो...!


***पूनम***

29 जून, 2017



शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

इस जहां में मुझ से दीवाना नहीं....



इस जहां में मुझ सा दीवाना नहीं...
खोजने से भी कोई मिलता नहीं...!

नींद कब से दूर आँखों से मेरी...
एक भी तो ख्वाब अब सजता नहीं !

बिन पिए मुझको नशा सा हो चला...
हूँ नशे में फिर भी मैं बहका नहीं..!

आपने अब तक न पहचाना मुझे...
था अभी तक दूर बेगाना नहीं...!

आपकी महफ़िल में हूँ रुस्वा मगर..
अश्क़ आँखों का हूँ अफ़साना नहीं...!

चाँदनी दामन में सिमटी इस तरह...
दिखता अब 'पूनम' कोई साया नहीं..!


***पूनम***

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

कोई रोये हँसा करे कोई......




कोई रोये हँसा करे कोई...
वो न समझे तो क्या करे कोई..!

है अजब चीज भी मुहब्बत ये...
या खुदा अब भला करे कोई..!

आज दिल फिर उसी पे आया है...
आज फिर जाँ जला करे कोई..!

कल तलक वो मुझे नसीब न था...
आज इसका गिला करे कोई..!

वो है मगरूर अपनी सूरत पे...
फ़िक़्र क्यूँ हो मिटा करे कोई..!

पँछियों ने उड़ान भर ली है...
हाथ  'पूनम ' मला करे कोई..!


***पूनम***


सोमवार, 30 मई 2016

आप अब दिल में समाते जाइये..



जल रही शम्मा बुझाते जाइये..
आप अब दिल में समाते जाइये..!

जब मुनासिब ही नहीं रुकना तेरा..
रुठती हूँ मैं....मनाते जाइये..!

शाम से दिल कर रहा है जुस्तजू..
प्यार की खुशबू लुटाते जाइये...!

अब तलक है ये शहर भी अजनबी..
आप ही अपना बनाते जाइये...!

छू के आहिस्ता से पलकों को मेरी..
नींद पलकों में सजाते जाइये...!

रूठने में और आयेगा मज़ा..
आप अब मुझ को मनाते जाइये...!

दिल ने चाहा था कहे कुछ आपसे.. 
आप भी कुछ तो सुनाते जाइये..!

राह ए उल्फत में मिले  'पूनम' कोई ...
फूल कदमों में बिछाते जाइये..!


***पूनम***

१३ /९/२०१५

रविवार, 13 सितंबर 2015

कागज के टुकड़ों सा मन.......



कागज के टुकड़ों सा 
कभी कभी
बिखरता है मन...!
उड़ता जाता है
कितनी ही ऊंचाइयों को
छूता जाता है
हवा की लहरों के संग
कितने ही सँकरे
तीखे मोड़ों से गुज़र कर
टुकड़ा टुकड़ा...
टकरा कर आपस में
छू लेता है ज़मीन को
थक हार कर....!
फिर उभरते हैं..
उसमें कुछ अक्षर...
कुछ सीधे-साधे..
कुछ टेढ़े-मेढ़े...
और फिर कागज के टुकड़े 
जुड़ने लगते हैं यक ब यक...
और कुछ ऐसी ही 
रचना आकार ले लेती है....
स्वतः ही..........!!