रविवार, 25 दिसंबर 2011

तेरा होना......





अश्क बन जाऊं तो आँखों में छुपा सकता है !
दर्द बन जाऊं तो गीतों में  बदल  सकता   है !!

बनूँ   मुस्कान तो   होठों पे सजा   सकता   है !
बनूँ धड़कन तो अपने दिल में छुपा सकता है !!

गर बनूँ मोती गले मुझको लगा सकता है !
या बनूं फूल तो दामन से लगा सकता है !!

बन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
जानती  हूँ   मुझे  तू दिल  से लगा सकता   है !!

मेरे  हमराज ! मेरे  दोस्त ! तेरे  इक होने  से !
मेरे  जीवन  का  हर अंदाज बदल सकता है !!

13 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे हमराज ! मेरे दोस्त ! तेरे इक होने से !
    मेरे जीवन का हर अंदाज बदल सकता है !!


    ये दो लाइन बेहतरीन हैं बाकि पूरी नज़्म बहुत खूबसूरत !

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  2. क्या कहने, आपकी हर एक line बहुत ही लाजवाब हैं पूनम जी


    (आपका मेरे ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन;
    एक प्यार भरा अनुरोध)

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  3. बन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
    जानती हूँ मुझे तू दिल से लगा सकता है !!

    वाह!

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  4. कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. बहुत अच्छे पूनम जी बढ़िया हैं शेर......चौथे शेर में कुछ कमी सी लगी|

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  6. बन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
    जानती हूँ मुझे तू दिल से लगा सकता है !!

    दिल को छूने वाला शेर पूनम जी ..सारी गज़ल प्रेम को बयां करती है !

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  7. वाह वाह हर शेर खुबसूरत शेर दाद को मुहताज नहीं , बहुत खूब ....

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  8. मेरे हमराज ! मेरे दोस्त ! तेरे इक होने से !
    मेरे जीवन का हर अंदाज बदल सकता है !!बिलकुल सही.....एक शख्स का साथ जीवन को क्या से क्या बना देता है.

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  9. वाह! बेहद खूबसूरत...
    सादर बधाई....

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  10. वाह ………बहुत ही खूबसूरत अशरार्।

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