सोमवार, 28 नवंबर 2011

अशआर कुछ ऐसे भी......





ऐतबार गर करते हो तो,शर्त लगाते क्यूँ हो..
प्यार करते हो तो,बेतरतीबी से जताते क्यूँ हो !
अपने ही प्यार के लिए माँगी थी कभी मोहलत हमसे
आज दिन है कि गैरों के आगे दामन फैलाते क्यूँ हो !!

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अगर वो गैर न थे तो इतने दिनों तक रहे कहाँ ?
जब भी आयीं मुश्किलात तो उनके भी आंसू थे कहाँ ?
जिन्दगी की मुश्किलों से जब हमने निकाल ली कश्ती...
आज किनारों पे बैठ हैं वो,फिर--हम कहाँ ? तुम कहाँ ?

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जिस्म मिल  जाने से ही दिल नहीं मिलते,ऐ दोस्त !
जिस्म को छोड़ कभी दिल भी मिलाया होता...!!
आज गर खोल दिया दिल को *वरक़ की मानिंद तूने
**वरके-खाम  पे अपने भी  कभी गौर किया  होता !!
तू क्या समझेगा मुझे,खुद को समझ पाया है क्या ?
मुझको एक ***मौजूं   बना  ग़ज़ल में  ढाला होता   !!
* पन्ना
**अंदरुनी हालात
***शेर



16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर कोमल भावनाओं की भावाव्यक्ति बधाई

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  2. सुभानाल्ह.......बेहतरीन अशआर है.......तसवीर भी बहुत अच्छी लगी मैंने ले ली है कभी अपनी किसी पोस्ट में लगाने के लिए|

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  3. सभी शेर
    बहुत खूबसूरत और असरदार हैं
    मुबारकबाद .

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  4. तू क्या समझेगा मुझे,खुद को समझ पाया है क्या ?
    मुझको एक ***मौजूं बना ग़ज़ल में ढाला होता !!

    आपकी प्रस्तुति हर बार ही कुछ न कुछ कमाल का कर देती है.
    इस बार भी मेरे दिल को चुरा लिया है इसने.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,पूनम जी.

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  5. वाह क्या बात है दोस्त बहुत सुन्दर |

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  6. पूनम , बहुत ही सुन्दर नज़्म...दूसरा अंतरा तो जबर्दश्त रहा .. मन में कहीं जाकर ठहर गया जी ...

    बधाई !!
    आभार
    विजय
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    कृपया मेरी नयी कविता " कल,आज और कल " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/11/blog-post_30.html

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  7. पूनम जी !आप के सभी शेर
    बहुत खूबसूरत और शानदार है.......मेरी नई पोस्ट 'यादें' मेंआप का स्वागत है..

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  8. "जिस्म को छोड़ कभी दिल भी मिलाया होता...!!"
    बहुत सुंदर !

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  9. sushila ने आपकी पोस्ट " अशआर कुछ ऐसे भी...... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    "जिस्म को छोड़ कभी दिल भी मिलाया होता...!!"
    बहुत सुंदर !

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  10. अच्छी प्रस्तुति मुश्किल अल्फाजों के अर्थ दिए हैं अच्छा किया है .सभी अश -आर खूबसूरत .

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