गुरुवार, 3 नवंबर 2011

इन्द्रधनुष......



मेरे अधरों पर
वो स्पर्श तुम्हारा
न भूल पायी मैं आज तक !
जब....
हौले से छू तुमने
पुकारा था मेरा नाम
मेरे ही कानों में....!
और एक इन्द्रधनुषी स्मित
खिल गयी थी गालों पर मेरे
यहाँ से वहां तक......
तब.....!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुभानाल्लाह...........बहुत खूबसूरत|

    उत्तर देंहटाएं






  2. पूनम जी
    वाकई ख़ूबसूरत एहसास !

    कहने को शेष नहीं … … …


    … … …


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  3. और एक इन्द्रधनुषी स्मित
    खिल गयी थी गालों पर मेरे
    यहाँ से वहां तक......
    तब.....!!

    इसे संजोये रहिये पूनम जी जिंदगी का कुछ भरोसा नहीं !

    उत्तर देंहटाएं
  4. पूनम जी ...खूबसूरत अहसास प्रेम की पराकाष्ठा.....गजब की अनुभूति .आनंद आ गया .बधाई हो
    भ्रमर ५

    और एक इन्द्रधनुषी स्मित
    खिल गयी थी गालों पर मेरे
    यहाँ से वहां तक......
    तब.....!!

    उत्तर देंहटाएं