रविवार, 8 सितंबर 2013

नाम जब भी तेरा लिया मैंने....





नाम जब भी तेरा लिया मैंने..
खुद से बदला सा इक लिया मैंने..

कोशिशें की न भूल पाई पर
खुद को नाहक़ थक़ा लिया मैंने...

अब मुहब्बत की क़ैद में हूँ मैं
खुद को आज़ाद कर लिया मैंने...

ज़िंदगी शाद हो गई गोया
तुझको खुद में छिपा लिया मैंने...

यूँ तो बदनाम है तेरी 'पूनम' 
पर मज़ा इस में भी लिया मैंने...


***पूनम***

12 टिप्‍पणियां:

  1. यूँ तो बदनाम है तेरी'पूनम'
    पर मज़ा इस में भी लिया मैंने...

    वाह वाह !!! बहुत ही सुंदर गजल ,,,
    RECENT POST : समझ में आया बापू .

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  2. अब मुहब्बत की क़ैद में हूँ मैं
    खुद को आज़ाद कर लिया मैंने...

    बहुत खूब ... मुहब्बत की कैद में आ जाने के बाद आज़ादी मिल जाती है सब को ...
    अच्छा ख्याल है ...

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १० /९ /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

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  4. यूँ तो बदनाम है तेरी 'पूनम'
    पर मज़ा इस में भी लिया मैंने...बहुत सुंदर गजल
    latest post: यादें

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  5. नमस्कार आपकी यह रचना आज मंगलवार (09-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  7. यूँ तो बदनाम है तेरी 'पूनम'
    पर मज़ा इस में भी लिया मैंने..

    बेबाक बयानी दिल को छूती

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