मंगलवार, 24 सितंबर 2013

ख्वाहिश.....




नज़र की ख्वाहिश का दिल बीमार था रोता रहा..
रात भर  आँखों  से .... तेरा  इंतजार होता रहा..!!

चाँद कब से सो रहा था बादलों की ओट में..
आँख मेरी  नम हुई जब साथ वो रोता रहा..!!

बज़्म मेरी थी मगर था जिक्र तेरा हर तरफ..
थे  बहुत बीमार....तेरा फिक्र ही होता रहा..!!

याद के झोंकों ने जब भी कर दिया गाफिल हमें..
आसमां  का  इक  सितारा  साथ  में  रोता रहा..!!

अब फलक से लौट के आवाज़ भी आती नहीं..
कौन  है  बेबस  मेरी  आवाज़  पे  सोता  रहा..!!

थीं तो यूँ बातें बहुत 'पूनम' बताने  के लिए..
रात भर बस एक तेरा जिक्र ही होता रहा..!!






11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (26-09-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 128" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (26-09-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 128" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  3. बहुत खूब दी शानदार ग़ज़ल तीसरे शेर का काफ़िया थोडा बहक गया :-)

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  4. आपकी यह प्रस्तुति 26-09-2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  5. सुन्दर अभिव्यक्ति .खुबसूरत रचना
    कभी यहाँ भी पधारें।
    सादर मदन
    http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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