रविवार, 14 अप्रैल 2013

उसकी नज़र......










उनसे नज़र मिली तो हम बेहोश हो गए..
नज़रों ने किया वार था तलवार की तरह...!!

छुप छुप के कोई देखता रहता है रात भर..
गोया छुपा हो बदलियों में चाँद की तरह...!!

हमने तो उसको एक ज़माने से नहीं देखा 
दिल में वो रह रहा है मेरे यार की तरह....!!

मेरी ये मुस्कुराहटें उसकी उसकी नियामतें...
वो देखता है यूँ दिल-ए-बीमार की तरह...!!


आज और अभी...





13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 17/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. छुप छुप के कोई देखता रहता है रात भर..
    गोया छुपा हो बदलियों में चाँद की तरह...

    होगा कोई चातक प्रियतमा की तलाश में ... बहुत उम्दा लिखा है ..

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  3. छुप छुप के कोई देखता रहता है रात भर..
    गोया छुपा हो बदलियों में चाँद की तरह...!!--
    प्रेम का गहरा अहसास
    सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    शुभकामनायें


    मेरे ब्लॉग में भी पधारें

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १६ /४/ १३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

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  5. मेरी ये मुस्कुराहटें उसकी उसकी नियामतें...
    वो देखता है यूँ दिल-ए-बीमार की तरह...!!

    वाह वाह !!! बहुत उम्दा शेर ,आभार

    Recent Post : अमन के लिए.

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  6. वाह्ह्ह्हह्ह ...बहुत ही खूबसूरत रचना ... उम्दा एहसासात और जज़्बात उतारे हैं आपने अपने अल्फ़ाज़ में ... बहुत खूब पूनम जी... . बहुत सी दाद ओ मुबारकबाद...

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  7. सुंदर रचना...वाह...!!!!
    उत्कृष्ट प्रस्तुति...

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