बुधवार, 3 अप्रैल 2013

तस्वीर.....







मेरे ज़ेहन में है एक तस्वीर...
जो अभी बनानी बाकी है...!
और बचे हैं कुछ 
फैले फैले से ज़ज्बात...
कुछ उड़े उड़े से ख़यालात...
कुछ बदन की सनसनाहट...
दबे होठों की मुस्कराहट...
किसी के अनजाने ही 

एकाएक छू जाने भर से 
एक अजीब सी सिहरन...
आसमां में उड़ते बादलों सी
किसी चेहरे की रंगत...
और भी बहुत कुछ बाकी है....
रंग भरने के लिए....!
लेकिन इस सबके लिए 
बस्ते में बचे रंग....
बहुत कम पड़ जा रहे हैं....!!






16 टिप्‍पणियां:

  1. पल हैं कम और भागता है जीवन ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...!!

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 06/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  3. प्रेम के रंग हर बार कम पड़ जाते हैं...यह दिल मांगे मोर..

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  4. मांग लो आकाश से नीला रंग,
    खेतों से हरा रंग चुरा लो..
    थोड़े रंग इन्द्रधनुष से ले लो....
    मोर के पंखों में अपनी तूलिका डूबा लो...
    तस्वीर पूरी ज़रूर करो..
    :-)

    अनु

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  5. प्रयास अपना होना चाहिए भरपूर रंगने का ...
    प्रेक के रंग कभी नहीं थोड़े पड़ते ...

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  6. ज़रासे प्यार की कमी भर है ...जो यह मिल जाये तो तस्वीर मुकम्मल हो जाये

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  7. गहन अनुभूति सुंदर रचना
    बहुत बहुत बधाई

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  8. अगली बार पूरी हो जानी चाहिए तस्वीर ....:))

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  9. बस्ते में बचे रंग....
    बहुत कम पड़ जा रहे हैं....!!


    शुरू तो करें ..रंग कम नहीं पड़ेंगे

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  10. प्रयत्न जारी रखे , निश्चित है तस्वीर बन जाएगी
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  11. जज्बातों को समेटने का संवेदनशील प्रयास एक सार्थक कविता के रूप में.

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  12. वाह्ह्ह्हह्ह ...बहुत ही खूबसूरत रचना ...बहुत खूब पूनम जी... . बहुत सी मुबारकबाद...

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