सोमवार, 8 अप्रैल 2013

नज़रें......




नज़रों को झुका कर उसने
आँचल को दांतों से जब दबाया...
आँखों में एक शोखी सी उभरी...
मानो काली रात में 
पूरा चाँद नज़र आया..!
जो तीर चले उसकी नज़रों से...
घायल हुए हैं दिल बेचारे...
प्यार किसे कहते हैं जानां...
हम कहते हैं....
हम दिल हारे.....!!!



अभी अभी.....






16 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 10/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. हम कहते हैं....
    हम दिल हारे...
    ------------
    दिलकश ...

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  3. घायल हुए हैं दिल बेचारे...
    प्यार किसे कहते हैं जानां...
    हम कहते हैं....
    हम दिल हारे.....!!!बहुत सुंदर रचना !!!

    RECENT POST: जुल्म

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  4. आज की ब्लॉग बुलेटिन दिल दा मामला है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. दिल हारे????
    या जीत लिया दिल किसी का :-)

    अनु

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  6. ओर डच कहो तो प्यार भी लसे ही कहे हैं ...
    दिल हार के भी जीत लेना दुनिया को ...

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  7. प्रेम में हारना जितना एक सामान है ,हम हारे या दिल हारे

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  8. आँचल को दांतों से जब दबाया...इन पंक्तियों का कोई जबाब नहीं ..पढता तो मैं आगे भी गया पर मन यहीं रुक गया ..शानदार

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  9. घायल हुए हैं दिल बेचारे...
    प्यार किसे कहते हैं जानां..
    .सुन्दर रचना

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  10. नवरात्रों की बहुत बहुत शुभकामनाये
    आपके ब्लाग पर बहुत दिनों के बाद आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
    बहुत खूब बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    मेरी मांग

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