मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

तुम आये तो.....







तुम क्या आये...
फिर गालों पे चटकीं कलियाँ...
तुम क्या आये...
फिर बालों में कुछ ख़म उभरे...
तुम क्या आये...
फिर बिन पायल पाजेब बजी...
तुम क्या आये...
आकाश से ज्यूँ चंदा उतरे...
तुम आये तो..
कुछ महकी महकी हवा चली...
तुम आए तो....
फिर अलसाई सी दूब जगी...
तुम आये तो...
कुछ गुमसुम से ज़ज्बात हँसे...
तुम आये तो.....
जो सोये थे...एहसास जगे...

तेरे आने से सब कुछ है....
तू है...
मैं हूँ.....
मेरा रब है....!!




12 टिप्‍पणियां:

  1. तेरे आने से सब कुछ है....
    तू है...
    मैं हूँ.....
    मेरा रब है....!!

    बहुत सुंदर रचना

    Recent Post दिन हौले-हौले ढलता है,

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  2. तू है तो ज़िन्दगी है ...प्यार की इन्तहा ...:)

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  3. ise prem ki ek paribhasha ke roop me behichak sweekar kiya ja sakta hai. Aabhar itni samvedansheel rahna ke liye...

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  4. अगर तू न आया तो
    न तू बचेगा
    न ही मैं और न ही
    रब !

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  5. अच्छी रचना, बहुत सुंदर.
    चार पल की जिंदगी में ,मिल गयी सदियों की दौलत
    मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला

    वक़्त भी कुछ इस तरह से आज अपने साथ है
    चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला.

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  6. तेरे आने से सब कुछ है....
    तू है...
    मैं हूँ.....
    मेरा रब है....!!
    बहुत खुबसूरत एह्सास है
    latest postअनुभूति : कुम्भ मेला
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  7. प्रेम में भीगी नायिका के उदगार..सुंदर प्रस्तुति !

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  8. तुम आये तो...
    कुछ गुमसुम से ज़ज्बात हँसे...
    ..........................................
    काफी दिलकश ...

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