बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

बेकरारी में दे करार...वो बहार हो तुम.......







बहुत दिनों से मुझे इंतज़ार था जिसका
मेरे जीवन की वही वस्ल-ए-बहार हो तुम !

मेरे लबों पे आ के ठहर गयी जो अब तक
वही हंसी हो ,वहीँ नज़्म और ख्याल हो तुम !

यूँ मेरी जिंदगी पहले भी रही शाइस्ता
शाइस्त-ए-कलाम हो,मेरे अल्फाज़ हो तुम !

मैं दुनिया में रहूँ....या दूर रहूँ दुनिया से
अलहदा रह के भी इस तरह मेरे पास हो तुम !

न जाने क्या हुआ,और क्यूँ हुआ,मैं क्या जानूँ
मेरी नज़र में, मेरे दिल में, मेरे पास हो तुम !

तुम मुझसे दूर रहो....मैं रहूँ जुदा तुमसे
बेकरारी में दे करार...वो बहार हो तुम....!


हैप्पी वेलेंटाइन.....
आपको....
आपको.....
आप सभी को......




9 टिप्‍पणियां:

  1. मुक़म्मल ग़ज़ल.......बहुत खूब......आपको भी बहुत मुबारकें जी ।

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  2. न जाने क्या हुआ,और क्यूँ हुआ,मैं क्या जानूँ
    मेरी नज़र में, मेरे दिल में, मेरे पास हो तुम ..

    जब प्रेम की खनखनाहट जागती है ... अपने आप ही कुछ हो जाता है ...

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