शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

नसीब-ए-जाँ.........





 


बूँद की किस्मत में गर होगा मोती बन जाना
तो इंतज़ार होगा किसी सीप को उसका भी... 

यूँ ही बाहों में नहीं थमता कोई किसी को
किसी नज़र को होगा इंतज़ार उसका भी...... 

आँख से टपका जो आंसू कोई तो पोछेगा 
कोई तो होगा नसीब-ए-दामन उसका भी... 

रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको 
ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी..... 

यूँ तो आते हैं औ जाते हैं मुसाफिर कितने 
कोई दम भर जो ठहर जाए वो आशियाना भी... 

बदन तपे जो कभी थामने वाला हो कोई 
किसी आगोश में होगा मेरा ठिकाना भी.....

न हो ये सोच कर खुश ए मेरे रकीब-ए जाँ !
कभी तो होगा तेरा दिल मेरा ठिकाना भी.....



23 टिप्‍पणियां:

  1. कल शनिवार 25/02/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in> नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

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  2. बहुत बढ़िया...
    रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको
    ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी.....

    वाह!!!

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  3. न हो ये सोच कर खुश ए मेरे रकीब-ए जाँ !
    कभी तो होगा तेरा दिल मेरा ठिकाना भी.....
    ..
    क्यों नहीं पूनम जी ..यही विश्वाश और थोड़ा धैर्य !!

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  4. बदन तपे जो कभी थामने वाला हो कोई
    किसी आगोश में होगा मेरा ठिकाना भी.....
    ...

    रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको
    ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी.....
    बहुत सुंदर भाव पूनम जी

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  5. सुभानाल्ह.....खुबसूरत ग़ज़ल....दाद कबूल करें दी।

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. कविता का भाव बहुत ही अच्छा लगा । मेरे पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  8. इंतज़ार होगा किसी सीप को उसका भी...
    वाह! बहुत खूबसूरत...
    सादर.

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  9. रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको
    ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी.....

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  10. रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको
    ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी.....
    लिखा आपने अनुभूति सांझा है मेरी तेरी उसकी ...

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  11. हर्फ़ दर हर्फ़ गहराई बढती ही जा रही है इस खुबसूरत नज़्म की..वाह !..जी शुक्रिया ..

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  12. अति उत्तम,सराहनीय सुंदर गजल के भाव अच्छे लगे .....

    NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

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  13. बदन तपे जो कभी थामने वाला हो कोई
    किसी आगोश में होगा मेरा ठिकाना भी.....

    बहुत खूब ... कभी कभी कसी के ख्वाब भी ठिकाना बन जाएँ हैं दर्द में ... लाजवाब ...

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  14. प्रेम की उम्मीद का खूबसूरत अक्स

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  15. न हो ये सोच कर खुश ए मेरे रकीब-ए जाँ !
    कभी तो होगा तेरा दिल मेरा ठिकाना भी.....
    रात आगोश में ले लेती है यूँ तो सबको
    ज़हे नसीब कोई बांह हो बिछौना भी.....

    behatreen gajal poonam ji badhai sweekaren.

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  16. बहुत ही सुन्दर
    भाव अभिव्यक्ति है..
    बहुत ही बढ़िया गजल...
    :-)

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