मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

कहीं वो तुम तो नहीं.............???


एक चेहरा है जो  हर  चेहरे में  मिल जाता है !
जब भी की  आँखें  बंद वो ही नज़र आता है !!

कभी शब्दों को  बदल गीत वो बन जाता है  !!
फिर वही गीत  मेरे  होठों पे बस  जाता   है !

बस के आँखों में मेरे दिल में उतर जाता है !
कभी बन फूल मेरी जुल्फों को महकता है !!

बन के मुस्कान मेरे चेहरे पे खिल जाता है !
सुनहरी  धूप सा रौशन मुझे कर जाता है !!

न कोई  नाम, न पहचान,  न रिश्ता है कोई !!
फिर भी कुछ है मेरा,जो सबमें नज़र आता है !

मेरा  सब कुछ   है वो, हर वक़्त साथ है मेरे !!
एक चेहरा जो बस अपना सा लगता है मुझे !

मैं   खोजती  हूँ   उसे   अपनों में  बेगानों  में !!
वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!

20 टिप्‍पणियां:

  1. मैं खोजती हूँ उसे अपनों में बेगानों में !!
    वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!

    आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । जो दिल के किसी कोने में रच- बस जाता है । वह दिल के करीब ही रहता है । सघन भावें से भरी कविता का हर रूप मर्माहत कर गया । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  2. अक्सर हम खुद को ही दूसरों में ढूंढते हैं ....
    मेरा वो साया कहीं मैं खुद तो नहीं या कही मेरी कोई कल्पना तो नहीं !

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  3. मैं खोजती हूँ उसे अपनों में बेगानों में !!
    वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!
    bahut khub kya bat hai mubarak ho .......

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  4. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल....दिल को छू लेने वाली....वाह |

    मेरे ब्लॉग की नयी पोस्ट आपके ज़िक्र से रोशन है......जब भी फुर्सत मिले ज़रूर देखें|

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  5. बहुत सुन्दर रचना पूनम जी ! हर शब्द बोलता सा प्रतीत होती है और हर भाव आँचल की तरह लिपट कर आत्मीयता का अहसास देता है ! बहुत अच्छा लिखा है आपने ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  6. behtarin..dilkash..har sher jaandar hai..badhayee aaur apne blog per amantran ke sath

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  7. बहुत खूबसूरत ग़ज़..वाह ..वाह..

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  8. वाह! बढ़िया...
    हर शेर सुन्दर...
    सादर

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  9. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच 659,चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  10. खूबसूरत... दिल को छू लेने वाली भावभरी गजल।
    दशहरा पर्व की शुभकामनाएं....

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  11. न कोई नाम, न पहचान, न रिश्ता है कोई !!
    फिर भी कुछ है मेरा,जो सबमें नज़र आता है !

    खूबसूरत !!
    _________________________________
    किसे जलाये - रावण को या राम को ???

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  12. मैं खोजती हूँ उसे अपनों में बेगानों में !!
    वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!

    सारे शेर बहुत उम्दा है. सुंदर प्रस्तुति.

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  13. न कोई नाम, न पहचान, न रिश्ता है कोई !!
    फिर भी कुछ है मेरा,जो सबमें नज़र आता है !

    भावुक जजबातों की सुन्दर प्रस्तुति. शुभकामनायें.
    www.belovedlife-santosh.blogspot.com

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  14. "वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!"
    itna apna ho jata hai??

    bahut pyare se jajbaat:)

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  15. न कोई नाम, न पहचान, न रिश्ता है कोई !!
    फिर भी कुछ है मेरा,जो सबमें नज़र आता है !

    खुबसूरत अभिव्यक्ति दी है आपने अपने विचारों को.

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  16. मैं खोजती हूँ उसे अपनों में बेगानों में !!
    वो जो छुपता है औ'फिर मुझमें ही मिल जाता है !!
    WAH PUNAM JI BAHUT KHOOB.. KAFI BARIKI SE LIKHA H AAPNE.. BDHAI SWIKAAR KRE

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  17. न कोई नाम, न पहचान, न रिश्ता है कोई !!
    फिर भी कुछ है मेरा,जो सबमें नज़र आता है !

    सुन्दर!

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