गुरुवार, 16 जनवरी 2014

मेरे अपने......






इक खुशी तुझसे मिलने की
इक गम तुझसे बिछड़ने का...
कुछ ख्वाब हैं अनछुए से
और दर्द है टूट जाने का... 
जो नींद में भी नहीं आते 
इंतज़ार है ऐसे सपने का...
छू गया जो मुझको चुपके से
एक हाथ है कोई अपने का...
कोई मुझसे बात करता है
कोई मुझमें मुझ सा रहता है
है ये साथ मेरे अपने का...
है ये साथ मेरे अपने का...!!


***पूनम***




8 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मौसम है शायराना - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. आपकी लिखी रचना शनिवार 18/01/2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    कृपया पधारें ....धन्यवाद!

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  3. अपनों का साथ यूँ ही बना यहे तो जीवन में क्या और चाहिए ...

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  4. वाह बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ |

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