शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

कौन दुनिया में ऐसा...जिसे गम नहीं...





कौन दुनिया में ऐसा...जिसे गम नहीं...
एक तुम ही नहीं...एक हम ही नहीं ...!!

दे रहा था गली में...सदा देर से...
ऐसा आशिक...किसी को मिलेगा नहीं...!!

चाँद चमका तो था...बस ज़रा देर को...
तेरे चेहरे के आगे...टिकेगा नहीं...!!

ज़ुल्फ़ बिखरा दो...शाने पे मेरे अगर..
शाम हो जायेगी...दिन रहेगा नहीं...!!

आप महफिल में आये...बड़ी देर से..
अब ठहर जाइये...जाइयेगा नहीं...!!



6 टिप्‍पणियां:

  1. आप महफिल में आये...बड़ी देर से..
    अब ठहर जाइये...जाइयेगा नहीं...!!

    ऐसे प्यारभरे मनुहार को मुश्किल होगा ठुकराना उनके लिए

    सुन्दर है आपकी यह प्यारभरी प्रस्तुति.

    आभार

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  2. वाह जी....
    क्या ग़ज़ल है क्या गुज़ारिश है..
    बहुत खूब!!
    अनु

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  3. बहुत सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई ---

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  4. प्रेम का एहसास लिए पल ... लाजवाब शेर सभी ...

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