रविवार, 15 अप्रैल 2012

तुम में 'मैं '.................




तुम मुझसे दूर थे कब...?
और जाओगे भी कहाँ...?
मेरी दो आँखें 
साथ रहती हैं तुम्हारे 
हरदम...
हर वक़्त !
मुझे दीखता है सब...!
तुम कहाँ, 
किस समय
क्या कर रहे हो...!
मुझे ये भी पता चल जाता है...
कि तुम क्या सोचते हो !
तुम्हारी हर बात तुमसे पहले
मुझे पता चल जाती है,
मेरी साँसें.....
तुम्हारी साँसों में घुल कर
साथ-साथ चलती हैं,
मेरी बाँहें तुम्हें ..
हर वक़्त घेरे रहती हैं,
मेरी ही थपकियाँ 
हर रात तुम्हें सुलाती हैं,
तुम चाह कर भी 
मुझसे दूर नहीं जा सकते
क्यूँ कि ....
मैं हर वक़्त,
हर जगह तुम्हारे साथ हूँ..
क्यूँ कि...
तुम मेरे हो...
और मैं...
तुम में 'मैं ' हूँ.....!


21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर प्रेममयी भावाव्यक्ति ,बधाई

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  2. बहुत सुंदर................
    प्रेमपगी रचना.................
    तुममे मैं, मुझमे तुम.........totally soluble.....

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  3. प्यारभरा अधिकार जताती सुन्दर कविता

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  4. वाह ! यही तो खुदा भी हमसे कहता है हर पल...सच !

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  5. क्यूँ कि...
    तुम मेरे हो...
    और मैं...
    तुम में 'मैं ' हूँ.....!
    फिर मैं और तुम कहाँ रहे
    बहुत सुन्दर

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  6. प्रेम का स्वरूप ..एक दूजे में समाहित ...

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  7. मैं हर वक़्त,
    हर जगह तुम्हारे साथ हूँ..
    क्यूँ कि...
    तुम मेरे हो...
    और मैं...
    तुम में 'मैं ' हूँ.....!

    awesome lines and use of words is very nice, your modern style of writing is also cool...

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  8. नमस्ते............बहुत खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  9. PUNAM JI MAI KISI KI BHI JHOOTI TARIF NHI KARTA..
    YE KAVITA BAHUT-BAHUT HI ACHHI HAI..
    MUJHE AISA LAGA JAISE YE KAVITA MAINE LIKHI HO..
    HAR SENTENCE COMPLETE HAI..
    MUJHE KUCHH LAINE BAHUTI DIL AZIZ LAGIN JAISE..
    मेरी साँसें.....
    तुम्हारी साँसों में घुल कर
    साथ-साथ चलती हैं,

    मुझे ये भी पता चल जाता है...
    कि तुम क्या सोचते हो !
    तुम्हारी हर बात तुमसे पहले
    मुझे पता चल जाती है.

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  10. मुझसे दूर नहीं जा सकते
    क्यूँ कि ....
    मैं हर वक़्त,
    हर जगह तुम्हारे साथ हूँ..
    क्यूँ कि...
    तुम मेरे हो...
    और मैं...
    तुम में 'मैं ' हूँ.....!
    कृपया यहाँ भी पधारें -

    सोमवार, 30 अप्रैल 2012
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