बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ये क्या दिया तू ने....






                                       जिंदगी के मायने बदल दिए तू ने 
                                       दिन  और  रात बदल  दिए तू  ने !
                                       रिश्ते-नाते, उसूल, रस्मों-रिवाज़
                                       दोस्ती के मायने बदल दिए तू ने !
                                       प्यार  में  दर्द तो  मुकम्मल  है 
                                       दर्द  हमदर्द  यूँ  दिया  तू   ने !
                                       तुझसे उम्मीद-ए-वफ़ा रखते थे 
                                       बेवफा  जाने  क्या दिया तू  ने ?  
                                       पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
                                       माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??

17 टिप्‍पणियां:

  1. पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
    माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??

    सुंदर मन के उदगार ...!!
    शुभकामनायें ,,,,!!

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  2. कल 06/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
    माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??
    खुबसूरत एहसास के साथ बंदगी एक इल्तजा भी
    एक दरख्वास्त भी .आपके भावों के सम्प्रेषण से आनंद के साथ
    जलन का एहसास होता है .बधाई स्वीकारें .

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  4. प्यार में दर्द तो मुकम्मल है
    दर्द हमदर्द यूँ दिया तू ने !

    बहुत सुन्दर पूनम जी....

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  5. बेवफा करने वालों से वफ़ा की उम्मीद ही गलत थी ...
    गहरी बात लिखी है ...

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  6. पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
    माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??...
    खुदा मिले तो सेम टू का सेम मुझे भी पूछना है पूनम जी
    कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा ...ऐसा क्यों ?
    :))

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  7. जब खुदा मिले,तो अपने को धन्य समझिएगा। वहां भी अगर शिकायत लगाई,तो क्या कहेगा खुदा!

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  8. दर्द भी बे इंतिहा मिला ...खूबसूरत प्रस्तुति

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  9. माँगा हुआ कब मिलता है भला ..
    बहुत खूबसूरत रचना

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  10. पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
    माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??
    खूबसूरत रचना

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  11. first visit.
    कुछ कहो प्रिय !!! कौन हो तुम?? दे व्यथित मन को अपरिमित- सांत्वना तुम हो गए गुम!!

    ultimate lines.

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