शनिवार, 9 अप्रैल 2011


तुम्हारे लिए........

तुम्हारे दरवाजे पे
जो सूखे फूल हैं
मेरी यादों के...
चुन लेना उन्हें
और दबा देना
किसी किताब में !
एकांत में...
जब पन्ने पलटोगे
तो खुशबू बिखर जायेगी
हर सू..........!! 

4 टिप्‍पणियां:

  1. एक खुशबूदार अहसास कराती सुन्दर रचना के लिए आभार.
    मेरे ब्लॉग ' मनसा वाचा कर्मणा ' पर आपका स्वागत है.

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  2. बहुत सुन्दर ...खूबसूरत एहसास



    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

    उत्तर देंहटाएं
  3. राकेशजी..

    संगीता जी..

    मेरे नए ब्लॉग पर सम्मति देने के लिए धन्यवाद !!

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  4. संगीताजी...
    एक बार फिर से आपकी दिल से शुक्रगुजार हूँ...
    आपके सहयोग से मुझे फिर से कुछ सीखने को मिला...
    कुछ और कहीं कमी दिखे तो छोटी बहन या दोस्त,
    जो आपको उचित लगे, समझ कर मेरा मार्गदर्शन करे...!!
    दिल से आभार....

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