बुधवार, 10 जुलाई 2013







मैं एतबार के काबिल उसे समझती रही
तमाम राज़ दिल के उससे share करती रही...
हमारे दिल की कहीं कोई ग़लतफ़हमी थी 
वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से...!!




***पूनम***



11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11/07/2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  2. बहुत सुंदर, क्या बात


    कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री असली चेहरा : पढिए रोजनामचा
    http://dailyreportsonline.blogspot.in/2013/07/like.html#comment-form

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  3. गजब है
    ओ पिछली रुत के साथी
    अबके बरस मैं तनहा हूँ।

    पधारिये और बताईये  निशब्द

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  4. दिल तो है दिल...क्या कीजे !

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  5. मैं एतबार के काबिल उसे समझती रही
    तमाम राज़ दिल के उससे share करती रही...
    हमारे दिल की कहीं कोई ग़लतफ़हमी थी
    वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से...!!
    वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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  6. ये उनकी अदा है ... झूठ भी बोलते हैं ऐसे की मज़ा देने लगता है ...

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  7. कुछ सिखाती समझाती कविता...... बहुत सुंदर भाव

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  8. बहुत उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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