शनिवार, 12 मई 2012





पूज्य गुरुजी......
श्री श्री रविशंकर जी के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई ......




मैं क्या हूँ ....
कुछ भी तो नहीं
जो हूँ.....
बस तुम हो !
तुम कहते हो मुझसे...
और तुम ही सुनते हो  !
तुम ही हँसते हो मुझमें...
और तुम ही रोते भी हो !
जब खिलखिलाती हूँ मैं 
सुबह की धूप से खिल जाते हो,
मेरे ही चारों तरफ....!
दूर जाती भी हूँ कभी तुमसे जो मैं
मुझे फिर वापस ले आते हो,
तुम अपनी ही तरफ...!
मेरी आँखों की चमक में 
बसे रहते हो तुम हर वक़्त !
मुस्कराहटों में भी...
छिपे रहते हो तुम हर वक़्त !
गुनगुनाती हूँ जब भी....
बांसुरी से बज उठते हो !
मेरे गीतों में.....
मेरे साथ -साथ गाते हो !
प्रार्थनाओं में मेरी....
तुम ही तो मुसकुराते हो....!!

9 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति! आपकी कविता में भाव की बहुलता इसे पठनीय बना देती है । श्री श्री रविशंकर जी को सादर नमन। मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद

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  2. मेरे गीतों में.....
    मेरे साथ -साथ गाते हो !
    प्रार्थनाओं में मेरी....
    तुम ही तो मुसकुराते हो....!!

    सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...बढ़िया रचना,.....

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  3. मैं क्या हूँ.....कुछ भी तो नहीं......बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....जय गुरुदेव ।

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  4. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

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  5. सदगुरु को नमन...सुंदर भाव !

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