मंगलवार, 13 मार्च 2012

वजूद ........







बिना रंगों के जो रंग चढ़ गया है
खुली आँखों से वो दिखता नहीं है !
तेरे न होने का संग  जो मज़ा  है
संग रह के भी वो मिलता नहीं है !

                                          महक फूलों की जो रच बस गयी है
                                          न जाऊं गर चमन में भी तो क्या है !
                                         चाँदनी  छा  गयी  है आज  हर  सू
                                         गगन में चाँद न निकला तो क्या है !

उठाती हूँ जब मैं आँखों को अपनी
बिखर जाती  यूँ  हर  सू रौशनी है !
अगर आ जाएँ आंसू भी पलक पर
मेरे  संग  सारी  दुनिया ही दुखी  है !

                                    ख़ुशी  मिलती  है तेरे संग रह  के
                                   अकेले रह के भी मुझको ख़ुशी है !
                                   सिहरती  हूँ  तेरे स्पर्श  से  मैं
                                   छुए न तू मुझे फिर भी ख़ुशी है !

अजब ये रंग  है इस दिल का यारों
किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
अब  तलक था रहा अलग  मुझसे
यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!

18 टिप्‍पणियां:

  1. तू साथ तो तेरा साथ प्यारा........
    तू नहीं तो मेरा "मैं" यारा.........

    सुन्दर भाव पूनम जी....

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  2. ख़ुशी मिलती है तेरे संग रह के
    अकेले रह के भी मुझको ख़ुशी है !
    सिहरती हूँ तेरे स्पर्श से मैं
    छुए न तू मुझे फिर भी ख़ुशी है !
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,भावपूर्ण सुंदर रचना,...

    RESENT POST...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

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  3. ख़ुशी मिलती है तेरे संग रह के
    अकेले रह के भी मुझको ख़ुशी है !
    सिहरती हूँ तेरे स्पर्श से मैं
    छुए न तू मुझे फिर भी ख़ुशी है !

    अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
    अब तलक था रहा अलग मुझसे
    यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!
    very nice ...

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  4. अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
    अब तलक था रहा अलग मुझसे
    यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!

    बहुत सुंदर ! खुद से मिलना जब होता है
    तब यह जग अच्छा लगता है

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  5. बिना रंगों के जो रंग चढ़ गया है
    खुली आँखों से वो दिखता नहीं है !
    तेरे न होने का संग जो मज़ा है
    संग रह के भी वो मिलता नहीं है !


    जुदाई में तड़प की मजा ही कुछ और है...!
    बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति !

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  6. कल 15/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. रूहानी अहसास से भरी हुई कविता है

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  8. अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
    अब तलक था रहा अलग मुझसे
    यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!

    सुभानाल्लाह......बहुत खुबसूरत ।

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  9. अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !

    कुछ रिश्ते हमारी ज़िन्दगी में यूं वाबस्ता हो जाते जैसे किसी पेंटिंग में बेकड्रॉप ...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  10. अपना असल वजूद पाना ही जीवन है ...
    लाजवाब शब्द हैं ... बहुत खूब ...

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  11. बहुत प्यारी कविता पूनम जी

    अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
    अब तलक था रहा अलग मुझसे
    यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!

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  12. वजूद मिल जाए तो रब मिल जाए..बेहतरीन..

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  13. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    इस रचना के लिए बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  14. "बिना रंगों के जो रंग चढ़ गया है
    खुली आँखों से वो दिखता नहीं है !
    तेरे न होने का संग जो मज़ा है
    संग रह के भी वो मिलता नहीं है !
    अजब ये रंग है इस दिल का यारों
    किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
    अब तलक था रहा अलग मुझसे
    यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!"
    sundar prastuti.....

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  15. प्रभावशाली रचना....
    शुभकामनायें आपको !

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