रविवार, 10 जुलाई 2011

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
चाँद और तुम.....
 
 
तारों से भरे
नीले आसमान के नीचे
खुली छत पर
चांदनी की बिछी
सफ़ेद बेदाग़ चादर पर
बस यूँ ही
बैठे-बैठे.....
देर तक
तुम्हारे बालों को
अपने हाथों से सहलाते हुए
मेरा जी चाहता है...
तुमसे ढेर सी बातें करने का
कभी-कभी.....!!
 

14 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल अहसासों को व्यक्त करती आपकी चाहत अनोखी सी है.
    चाहत ही जीवन की पतवार है.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.चाहत का वर्णन करती ही नई पोस्ट लिखी है.

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  2. वाह ...वाह.......दिल को छू लेने वाली पोस्ट है ये.......प्यार का नर्म सा अहसास.....शानदार|

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  3. तुम्हारे बालों को
    अपने हाथों से सहलाते हुए
    मेरा जी चाहता है...
    तुमसे ढेर सी बातें करने का
    कभी-कभी.....!!

    सरलता में गहराई ज्यादा होती है पूनम जी बिना किसी बिम्ब और रूपक का इस्तेमाल किये हुए कितना कुछ कह गयी आप
    वाह !

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  4. खूबसूरत अभिव्यक्ति..बधाई.


    ___________________
    शब्द-शिखर : 250 पोस्ट, 200 फालोवर्स

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  5. खूबसूरत एहसास ... सादी सी ख्वाहिश ...

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  6. "तुम्हारे बालों को
    अपने हाथों से सहलाते हुए
    मेरा जी चाहता है...
    तुमसे ढेर सी बातें करने का
    कभी-कभी.....!!"
    पूनम जी,
    कभी-कभी दिल में ऐसी चाहत जगती है.बहुत कोमल और मखमली अहसास लिए है है आपकी रचना.

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  7. तारों से भरे
    नीले आसमान के नीचे
    खुली छत पर
    चांदनी की बिछी >>

    तुम होले से आना
    बिना शोर किया
    मुझ से मिल जाना
    कही भनक न लग जाये चांदनी
    को तुम्हारे आने की तुम तारों से भी नजरें
    बचा के आना ,.......होले से मेरे कान में तुम वो
    फिर वही धुन फिर से गुनगुना जाना .....

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