शनिवार, 4 जून 2011

 
 
तुम और  मैं...
 
तुम क्या हो मेरे ?
ये मैं ही जानती हूँ...!
मैं क्या हूँ ?
कुछ भी तो नहीं....
मैं खुद को भी तो
बस....
तुम्हारे नाम से ही जानती हूँ !!

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब! अच्छी पंक्तियाँ!

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  2. मैं खुद को भी तो
    बस....
    तुम्हारे नाम से ही जानती हूँ !!

    वाह, अनंत समर्पण,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  3. इतना समर्पण बहुत कम मिलता है.....और जहाँ मिलता है वहां प्रेम अपने ऊँचे ताल पर पहुँचता है |

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  4. बहुत अच्छी पहचान बताई है आपने अपनी.
    अपना अहं खोकर,
    उसमें समाकर.

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