गुरुवार, 8 मई 2014

आप जब से करीब आये हैं..



आप जब से करीब आये हैं..
गीत इस दिल ने गुनगुनाये हैं...!

मेरी आँखों में कुछ नमी सी है..
आप के अक्स झिलमिलाये हैं...!.

रात कुछ इस तरह हुई रौशन..
यूँ सितारे से टिमटिमाये हैं...!

हम बहुत देर तक रहे तन्हा..
आप आये तो मुस्कुराये हैं...!

रात 'पूनम' की आज आई है..
दिल पे अब आपके ही साये हैं...!


07/05/2014


3 टिप्‍पणियां:



  1. ☆★☆★☆



    आप जब से करीब आये हैं..
    गीत इस दिल ने गुनगुनाये हैं...!

    हम बहुत देर तक रहे तन्हा..
    आप आये तो मुस्कुराये हैं...!

    रात 'पूनम' की आज आई है..
    दिल पे अब आपके ही साये हैं...!

    वाह ! वाऽह…! वाऽऽह…!
    अब बड़े-बड़े ग़ज़लकारों का राज-पाट ख़तरे में लग रहा है...
    :)
    बढ़िया ग़ज़ल लिखी है
    आदरणीया पूनम जी
    बहुत बहुत मुबारकबाद !
    बधाई और मंगलकामनाएं !

    शुभाकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति ...!
    मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    RECENT POST आम बस तुम आम हो

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  3. हम बहुत देर तक रहे तन्हा..
    आप आये तो मुस्कुराये हैं...
    बहुत ही लाजवाब प्रेम का गहरा एहसास लिए ये ग़ज़ल ...

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