शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

कोई कह दे ये वाक़या क्या है...








जिंदगी ने जो दी सज़ा क्या है...
हम भी समझें....ये माज़रा क्या है...?

अब वो रहते हमारे पहलू में..
बात बस इतनी सी...ख़ता क्या है..?

हम समझते हैं उसकी मज़बूरी...
अब समझने को कुछ रहा क्या है...?

हुस्न पर यूँ मिटे हैं परवाने...
शम्मा कहती रही...जला क्या है...?
     
होंठ ख़ामोश, आँख नम है ग़र...
हम समझते हैं ज़लज़ला क्या है...?
    
दिल लगाया...सजा मुकर्रर हो...
इश्क़ में और कुछ बचा क्या है...?

नींद आँखों में जब उतर आये...        
ख्वाब का कोई सिलसिला क्या है..?

आप आये तो ये चमन महके....
गुल के खिलने का आसरा क्या है..?

चाँद गुमसुम है शबनमी 'पूनम'...
कोई कह दे ये वाक़या क्या है...?


***पूनम***
2/10/2015


8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 07 अक्टूबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 06/10/2018 की बुलेटिन, फेसबुकिया माँ की ममता - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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