सोमवार, 10 दिसंबर 2018

यही शिक़वा है मुझको ज़िन्दगी से...









नहीं मिलता यहाँ दिल हर किसी से...
यही शिक़वा है मुझको ज़िन्दगी से...!

किया है इश्क़ हमने आप से ही...
बताते हैं इसे हम तो खुशी से...!

नहीं मुमकिन है मिलना आप से अब...
मुझे आलम दिखे हैं बेबसी के...!

कभी नज़रों से मिल पायीं न नज़रें..
मगर चर्चे जवां हैं आशिक़ी के...!

चमकता चाँद 'पूनम' गुफ़्तगू कर...
बहुत किस्से तेरी जादूगरी के..!


***पूनम***
2 Dec, 2018



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