बुधवार, 24 अप्रैल 2019

गीत इक प्यार का सुना देना...





गीत इक प्यार का सुना देना...
रात तारों भरी सजा देना...!

ज़िन्दगी इस तरह से गुज़री है...

मौत को जैसे रास्ता देना...!

जब मुहब्बत से कोई देखे तो...

प्यार का प्यार से सिला देना..!

कब से है इंतज़ार मुझको भी...

सामने आ के मुस्कुरा देना...!

शाम से खुल गए हैं मैखाने...

मुझको नज़रों से तुम पिला देना...!

ज़िन्दगी एक बार ही मिलती...

यूँ ही बेकार मत गंवा देना...!

तेरी फ़ुरक़त में गमज़दा कब से..

रुख से परदा जरा हटा देना...!

बात जब भी कभी चले उसकी..

दर्द दिल के सभी भुला देना...!

वो सलामत रहे हमेशा ही...

अब तो तुम बस यही दुआ देना...!

रात 'पूनम' की बात फूलों की...

चाँद दामन में यूँ सजा देना...!


***पूनम***




सोमवार, 10 दिसंबर 2018

यही शिक़वा है मुझको ज़िन्दगी से...









नहीं मिलता यहाँ दिल हर किसी से...
यही शिक़वा है मुझको ज़िन्दगी से...!

किया है इश्क़ हमने आप से ही...
बताते हैं इसे हम तो खुशी से...!

नहीं मुमकिन है मिलना आप से अब...
मुझे आलम दिखे हैं बेबसी के...!

कभी नज़रों से मिल पायीं न नज़रें..
मगर चर्चे जवां हैं आशिक़ी के...!

चमकता चाँद 'पूनम' गुफ़्तगू कर...
बहुत किस्से तेरी जादूगरी के..!


***पूनम***
2 Dec, 2018



रविवार, 18 नवंबर 2018

चाँद से अपनी आशनाई है....



जबसे तुमसे नज़र मिलाई है...
रात आँखों में ही बिताई है...!

बेवज़ह रूठने मनाने में...
ख़ुशनुमा शाम यूँ गंवाई है..!

नाम लब तक कभी नहीं लाये..
हमने रस्मे वफ़ा निभाई है..!

लत लगी इश्क़ की हमें यारों...
हो गयी नींद अब पराई है...!

उनके चेहरे से उठ गया पर्दा...
चाँदनी जैसे झिलमिलाई है...!

ज़िन्दगी भर जिसे नहीं भूलें...
आज ऐसी घड़ी ही आयी है...!

हम जमाने से रंज ले बैठे...
जबसे नज़रों में वो समायी है..!

दिन गुज़र जाएगा मगर 'पूनम'...
चाँद से अपनी आशनाई है...!

***पूनम***
12 नवम्बर, 2018


शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

कोई कह दे ये वाक़या क्या है...








जिंदगी ने जो दी सज़ा क्या है...
हम भी समझें....ये माज़रा क्या है...?

अब वो रहते हमारे पहलू में..
बात बस इतनी सी...ख़ता क्या है..?

हम समझते हैं उसकी मज़बूरी...
अब समझने को कुछ रहा क्या है...?

हुस्न पर यूँ मिटे हैं परवाने...
शम्मा कहती रही...जला क्या है...?
     
होंठ ख़ामोश, आँख नम है ग़र...
हम समझते हैं ज़लज़ला क्या है...?
    
दिल लगाया...सजा मुकर्रर हो...
इश्क़ में और कुछ बचा क्या है...?

नींद आँखों में जब उतर आये...        
ख्वाब का कोई सिलसिला क्या है..?

आप आये तो ये चमन महके....
गुल के खिलने का आसरा क्या है..?

चाँद गुमसुम है शबनमी 'पूनम'...
कोई कह दे ये वाक़या क्या है...?


***पूनम***
2/10/2015


रविवार, 26 अगस्त 2018

समंदर हूँ, कभी सहरा रही हूँ....



समंदर हूँ, कभी सहरा रही हूँ..
तेरी आँखों का रंग गहरा रही हूँ..!

ज़माने ने जिसे देखा नहीं है..
मैं तेरे रू ब रू चेहरा रही हूँ..!

लबों की सुर्खियाँ लबरेज़ शबनम..
गुलों में शहद का कतरा रही हूँ..!

मैं बन कर ख़्वाब रंगी ज़िन्दगी के..
तेरी नज़रों में भी लहरा रही हूँ..!

कभी थी रात की मानिंद 'पूनम'..
अगरचे चाँद को ख़तरा रही हूँ..!

***पूनम***


सोमवार, 29 जनवरी 2018

**दिल में दर्द बसा कर देखो...**





दिल में दर्द बसा कर देखो...
हमसे आँख चुरा कर देखो...!

हार गए तो क्यूँ डरते हो...
खुद पर दाँव लगा कर देखो...!

हाल तुम्हारा बतला देंगे...
हमसे नज़र मिला कर देखो...!

बीती बातें,कल के किस्से...
सब को आज भुला कर देखो...!

पूरा चाँद उतर आएगा...
दामन तो फैला कर देखो...!

ख़्वाबों के सूने आँगन में...
यादों को महका कर देखो...!

तेरा मेरा क्या है रिश्ता...
चाहो तो आजमा कर देखो...!

'पूनम' रात, चमकते तारे...
महफ़िल ए इश्क़ सजा कर देखो...!


***पूनम***

29 जून, 2017



शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

इस जहां में मुझ से दीवाना नहीं....



इस जहां में मुझ सा दीवाना नहीं...
खोजने से भी कोई मिलता नहीं...!

नींद कब से दूर आँखों से मेरी...
एक भी तो ख्वाब अब सजता नहीं !

बिन पिए मुझको नशा सा हो चला...
हूँ नशे में फिर भी मैं बहका नहीं..!

आपने अब तक न पहचाना मुझे...
था अभी तक दूर बेगाना नहीं...!

आपकी महफ़िल में हूँ रुस्वा मगर..
अश्क़ आँखों का हूँ अफ़साना नहीं...!

चाँदनी दामन में सिमटी इस तरह...
दिखता अब 'पूनम' कोई साया नहीं..!


***पूनम***

इस जहां में मुझ से दीवाना नहीं....



इस जहां में मुझ सा दीवाना नहीं...
खोजने से भी कोई मिलता नहीं...!

नींद कब से दूर आँखों से मेरी...
एक भी तो ख्वाब अब सजता नहीं !

बिन पिए मुझको नशा सा हो चला...
हूँ नशे में फिर भी मैं बहका नहीं..!

आपने अब तक न पहचाना मुझे...
था अभी तक दूर बेगाना नहीं...!

आपकी महफ़िल में हूँ रुस्वा मगर..
अश्क़ आँखों का हूँ अफ़साना नहीं...!

चाँदनी दामन में सिमटी इस तरह...
दिखता अब 'पूनम' कोई साया नहीं..!


***पूनम***

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

कोई रोये हँसा करे कोई......




कोई रोये हँसा करे कोई...
वो न समझे तो क्या करे कोई..!

है अजब चीज भी मुहब्बत ये...
या खुदा अब भला करे कोई..!

आज दिल फिर उसी पे आया है...
आज फिर जाँ जला करे कोई..!

कल तलक वो मुझे नसीब न था...
आज इसका गिला करे कोई..!

वो है मगरूर अपनी सूरत पे...
फ़िक़्र क्यूँ हो मिटा करे कोई..!

पँछियों ने उड़ान भर ली है...
हाथ  'पूनम ' मला करे कोई..!


***पूनम***


सोमवार, 30 मई 2016

आप अब दिल में समाते जाइये..



जल रही शम्मा बुझाते जाइये..
आप अब दिल में समाते जाइये..!

जब मुनासिब ही नहीं रुकना तेरा..
रुठती हूँ मैं....मनाते जाइये..!

शाम से दिल कर रहा है जुस्तजू..
प्यार की खुशबू लुटाते जाइये...!

अब तलक है ये शहर भी अजनबी..
आप ही अपना बनाते जाइये...!

छू के आहिस्ता से पलकों को मेरी..
नींद पलकों में सजाते जाइये...!

रूठने में और आयेगा मज़ा..
आप अब मुझ को मनाते जाइये...!

दिल ने चाहा था कहे कुछ आपसे.. 
आप भी कुछ तो सुनाते जाइये..!

राह ए उल्फत में मिले  'पूनम' कोई ...
फूल कदमों में बिछाते जाइये..!


***पूनम***

१३ /९/२०१५

रविवार, 13 सितंबर 2015

कागज के टुकड़ों सा मन.......



कागज के टुकड़ों सा 
कभी कभी
बिखरता है मन...!
उड़ता जाता है
कितनी ही ऊंचाइयों को
छूता जाता है
हवा की लहरों के संग
कितने ही सँकरे
तीखे मोड़ों से गुज़र कर
टुकड़ा टुकड़ा...
टकरा कर आपस में
छू लेता है ज़मीन को
थक हार कर....!
फिर उभरते हैं..
उसमें कुछ अक्षर...
कुछ सीधे-साधे..
कुछ टेढ़े-मेढ़े...
और फिर कागज के टुकड़े 
जुड़ने लगते हैं यक ब यक...
और कुछ ऐसी ही 
रचना आकार ले लेती है....
स्वतः ही..........!!




आप अब दिल में समाते जाइये.....









जल रही शम्मा बुझाते जाइये..
आप अब दिल में समाते जाइये..!

जब मुनासिब ही नहीं रुकना तेरा..
रुठती हूँ मैं....मनाते जाइये..!

शाम से दिल कर रहा है जुस्तजू..
प्यार की खुशबू लुटाते जाइये...!

अब तलक है ये शहर भी अजनबी..
आप ही अपना बनाते जाइये...!

छू के आहिस्ता से पलकों को मेरी..
नींद पलकों में सजाते जाइये...!

रूठने में और आयेगा मज़ा..
आप अब मुझ को मनाते जाइये...!

दिल ने चाहा था कहे कुछ आपसे.. 
आप भी कुछ तो सुनाते जाइये..!

राह ए उल्फत में मिले  'पूनम' कोई ...
फूल कदमों में बिछाते जाइये..!


***पूनम***

सोमवार, 27 जुलाई 2015

दिल है दीवाना अपना.....





आपकी बात कहें या कि फसाना अपना...
क्या कहें आपसे ये दिल है दिवाना अपना.!

बात वाजिब थी तुझे भूल ही जाते हम भी..
क्या करें बात कोई दिल ही न माना अपना.!

यूँ तो आवाज़ कई बार लगाई उसने...
हो सका फिर भी नहीं लौट के जाना अपना..!

इश्क के नाम पे बस तोहमतें लेते आये...
झूठ ही कहते रहे दिल है सयाना अपना.!

चाँद चमका तो हुई रौशनी इतनी 'पूनम...'

हो गया आपके दिल में यूँ ठिकाना अपना.!






सोमवार, 29 जून 2015

कोई रोये, हँसा करे कोई....





कोई रोये,  हँसा करे कोई..
वो न समझे तो क्या करे कोई..!

है अजब चीज भी मुहब्बत ये..

या खुदा अब भला करे कोई..!

आज दिल फिर उसी पे आया है..

आज फिर जाँ जला करे कोई..!

कल तलक वो मुझे नसीब न था..

आज इसका गिला करे कोई..!

चाँदनी ने हिज़ाब पहना है..

अब तो छुपके मिला करे कोई..!

पँछियों ने उड़ान भर ली है..

हाथ अब क्यूँ मला करे कोई..!

वो है मगरूर अपनी सूरत पे..

फ़िक़्र क्यूँ हो मिटा करे कोई..!

रंग जमाने का चढ़ गया है जब..

बात क्यूँ कर सुना करे कोई..!

ज़िन्दगी की उदास राहों में.. 

संग 'पूनम' चला करे कोई..!

***पूनम***

28 जून, 2015


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

इक बात अधूरी सी....






दिल चाहता जो कहना वो बात है अधूरी
ख्वाबों  ने जो सजाई  बारात  है अधूरी..!

पुरवाइयों के झोंके तन मन जला रहे हैं 
तेरे बिना ओ साजन बरसात है अधूरी..!

चादर सी चाँदनी की पसरी हुई है छत पे
बेताबियाँ  बढ़ाती,  हर  रात  है  अधूरी..!

खिलते गुलों के चेहरे हमको लुभा न पाए 
तेरी  महक  बिना  हर सौगात  है अधूरी..!

क्यूँ  बोल ठहरे 'पूनम' तेरे मेरे लबों पर
क्यूँ हाय दास्तान-ए-नग़्मात है अधूरी..!



***पूनम***


शनिवार, 21 मार्च 2015

उन्वान.......




जिसकी आँखें कभी
नई नज़्म का
उन्वान हुआ करती थीं...!
जिसकी बातें कभी
झरनों की रवानी सी
बहा करती थीं...!
जिसके होठों की तलब
फूलों को रहा करती थी...!
जो तेरे दिल में कभी
धड़कन सी रहा करती थी...!
जिसके हाथों की छुअन
जिंदगी दे जाती थी...!
वो जो तेरे ख्वाबों में
हर वक्त मुस्कुराती थी...!
वो जो तुझमें ही
तेरी रूह सी बस जाती थी...
वो जो तेरे बोलों में
किसी गीत सी बज जाती थी...!
आज वो आँख भी
बेनूर हुई जाती है..!
और हर बात भी
बेबूझ हुई जाती है...!
तेरी बातों से
जो इक जिंदगी जी जाती थी
आज वो ज़िंदगी
पत्थर सी हुई जाती है...!!


***पूनम***
२१/०३/२०१५


मंगलवार, 30 सितंबर 2014

वो लम्हा.....






वो लम्हा...
आज भी वहीँ पड़ा है
जहाँ तुम छोड़ कर गये थे..!
वो थी बारिश की एक शाम..
जब तुम आये थे
मुझे हमेशा के लिए अलविदा कहने..!
हमारे चेहरे को आँसुओं ने
बारिश से ज्यादा भिगो दिया था...!
लेकिन तुम्हारे आखिरी स्पर्श का एहसास
न बारिश धो पाई है और न आँसू..!!
अलविदा कहने के बाद..
तुमने मुड़ कर देखा ही नहीं..!
तुम्हारी छतरी की तरह...
मैं भी तुम्हारे इंतज़ार में
उस आखिरी एहसास के साथ
आज भी मैं वहीँ खड़ी हूँ...
जहाँ तुम छोड़ के गये थे..!!

***पूनम***
30/9/2014


मंगलवार, 16 सितंबर 2014

मेरी तेरी एक जुबानी.......




इस जीवन की अजब कहानी...
                                              मेरी तेरी एक जुबानी !

आ जाती है याद तेरी जब...
                                        मुस्काऊँ....आँखों में पानी !

कतरा कतरा दिन है बीता...
                                           रौशन रौशन रात बितानी !

पीर फकीर ये कहते सबसे...
                                           ये दुनिया है आनी जानी !

तुमने मुझसे प्यार किया है...
                                         लेकिन मैं तेरी दीवानी !

नगमों की बरसात हुई है...
                                         फिर भी गीतों से अनजानी !

तेरी मेरी प्रेम कहानी...
                                    है दुनिया को मुझे बतानी !


दोस्त हुए सदियाँ हैं गुजरी...
                                           अब तक वो हमसे अनजानी !



मंगलवार, 19 अगस्त 2014

मेरी जान......







एक बार तुमने कहा था...
"मुझसे मिलने की एक ही शर्त है...
तुम्हारी जान मेरी ही होनी चाहिए.."
मैंने बड़ी जुगत लगाई...
लेकिन जान तुम्हारी न हो पायी...!
आज एहसास हुआ है कि
हमारी जान तो एक ही है...!
फिर भी इस बार अपनी जान
साथ ले ही आई हूँ...
और टाँग दी है
तुम्हारे ही कमरे में...
दीवार की ऊँची खूंटी पर...!
अब केवल प्रेम लेकर
एक कोने में बैठी हूँ...!
तुम्हें ज़रूरत हो जब भी
मेरी जान को...
खूंटी से उतार कर पहन लेना....!!
एकदम झक्कास लगोगे उस दिन...!!

   



***पूनम***



नीला.......








तुम किस फूल के नाम से
पुकारते हो मुझे...
ये तो मैं नहीं जानती !
लेकिन....
वो चम्पई रंग
जो सुना था तुमने,
तुम्हारे मुँह से
मेरा नाम सुनते ही
सारा का सारा
मेरे सुफैद गालों पर
उतर आता है यक ब यक !
और जानते हो.....
उस पल के लिए
मेरा नाम नीला से चम्पा हो जाता है....!



***पूनम***
22/07/2014