उस रात जब चाँद
मुस्कुराने की जुर्रत कर बैठा..
तब तुमने मेरी आँखें बंद दीं थीं
और कहा था कि मत देखो चाँद को...!
तुम्हें अच्छा नहीं लगता
कि मैं किसी और को देखूं...!
जब पहाड़ों पर बारिश होती है
तुम मेरे इर्द गिर्द...
प्यार की बरसाती तान देते हो
तुम्हें पता होता है कि..
बारिश अब यहाँ होने वाली है..
तुम हर उस रौशनी से
मुझे बचाने की कोशिश में लगे रहते हो...
जो तुम्हारे मेरे बीच आ जाती है...!
तुम हर उस पल को
बर्फ सा जमा देना चाहते हो
जो हमने साथ साथ बिताया है...!
मुझे पता है...
इस बर्फ के पिघल कर
फिर से पानी बनने के दौरान
तुम मुझे पल पल महसूस करना चाहते हो...!
***पूनम***
30/05/2014
( दिल्ली एअरपोर्ट...आज मौसम बहुत खराब है
और तुम्हारे अलावा कोई भी मेरे पास नहीं...)
करूँ मैं क्या....मुझे आँसू दिखाना ही नहीं आता..
सबक सीखा गया तुझसे...सिखाना ही नहीं आता !
बड़ी बेदर्दियों से तुमने तोड़ा जिस तरह दिल को..
बहुत सी कोशिशें कीं पर...बनाना ही नहीं आता !
मुसलसल राह तेरे संग गुजरी तंग फिर भी..कुछ
सुकूं रहता तेरे संग...गर जमाना ही नहीं आता !
हमारे दरमियाँ अब फासले जो इस तरह से हैं,
मिटेंगे किस तरह हमसे...मिटाना ही नहीं आता !
कभी सोचा न था ये ज़िंदगी कुछ इस तरह होगी..
ज़माना भी सुने हमसे... फ़साना ही नहीं आता !
तुझे दें बद्दुआ अब हम...नहीं फ़ितरत हमारी है..
बुरी बातों को कहना और सुनाना ही नहीं आता !
आप जब से करीब आये हैं..
गीत इस दिल ने गुनगुनाये हैं...!
मेरी आँखों में कुछ नमी सी है..
आप के अक्स झिलमिलाये हैं...!.
रात कुछ इस तरह हुई रौशन..
यूँ सितारे से टिमटिमाये हैं...!
हम बहुत देर तक रहे तन्हा..
आप आये तो मुस्कुराये हैं...!
रात 'पूनम' की आज आई है..
दिल पे अब आपके ही साये हैं...!
07/05/2014
न तुम आते न हम मिलते जमाना भी नहीं होता
नहीं मैं होती दीवानी....तू दीवाना नहीं होता...!
न मिल पायी मुहब्बत तो हुए क्यूँ खामखाँ बिस्मिल
नहीं है गैर कोई भी....मगर अपना नहीं होता...!
न जाने क्यूँ लगी रहती है दुनिया एक उलझन में..
अगर ऐसा नहीं होता...अगर वैसा नहीं होता...!
कहीं खोये हो तुम भी और हम भी कुछ परीशां हैं...
तुम्हारा दर्द दिखता है...बयां मुझसे नहीं होता...!
ज़माने ने तो देखीं हैं...मेरे चेह्रे पे दो आँखें...
बहुत खामोश रहती हैं..अयाँ इनसे नहीं होता...!
१८/०४/२०१४
चोट खायी है दिल पर मेरे दोस्तों...
अक्ल फिर भी न आई मेरे दोस्तों...!!
उसकी गलियों के चक्कर लगाते रहे...
उसने मुड़ के न देखा मेरे दोस्तों...!!
मेरी दुश्वारियां उसने समझीं नहीं...
हो गयी दूर मुझसे मेरे दोस्तों...!!
रोज ख्वाबों में जन्नत बनाता रहा..
पर नज़र वो न आई मेरे दोस्तों...!!
क्या कहें..कहना चाहा न कह पाए हम
जब वो थी मेरे पहलू मेरे दोस्तों...!!
चोट दिल पर लगी...एक उफ़ सी हुई...
फिर न जाने हुआ क्या मेरे दोस्तों...!!
आपकी बात 'पूनम' कहे भी तो क्या...
एक चुप सी लगी है मेरे दोस्तों...!!
गीत तुम आवाज़ मैं हूँ...!
पंख तुम परवाज़ मैं हूँ...!!
दूर तक फैली क्षितिज पर
लालिमा सी लाल मैं हूँ
तान हो तुम बांसुरी की...
बांसुरी का राग मैं हूँ...!
मैं नहीं हूँ तन अकेले
साथ मन में तू भी मेरे
मान मेरा है तुझी से
बुद्धि का परिमाण मैं हूँ...!
तेरी सांसों सी सुगन्धित
तेरी अलकों में सुशोभित
तेरी पलकों में बसी सी
एक मादक रात मैं हूँ...!
तुम मेरे मन में हो प्रियतम
फिर करूँ क्यूँ मैं ये क्रंदन
हाथ में जब हाथ तेरा
हर समय मधुमास मैं हूँ...!
हो भले जीवन ये कंटक
चाह तेरी साथ जब तक
भूल सारी व्याधियों को
एक तेरे साथ मैं हूँ...!
***पूनम***
३०/०१/२०११
वो मेरे दिल से क्यूँ उतर जाये...
खुद कहे और खुद मुकर जाये...!
वो ख़फ़ा है अगरचे मुझसे तो...
कैसे तकदीर ये संवर जाए...!
उसकी महफिल में बात जो बिगड़ी...
क्या करूं अब कि वो सुधर जाये...!
राह चलते हुए मिला मुझको...
वो समझ पाए न किधर जाये...!
कोई आया नहीं यहाँ अब तक...
एक साया सा ही लहर जाए...!
उसने जाने की अब तो ठानी है...
या खुदा वक्त कुछ ठहर जाये...!
उलझने हद से बढ़ गयीं मेरी...
क्या करूं अब न वो नज़र आये...!
उसका दिल क्यूँ कोई दुखाता है...
गम नहीं मुझपे जो गुज़र जाये...!
काश ! शब लौट आये पूनम की...
चांदनी दर पे फिर बिखर जाए...!