
अश्क बन जाऊं तो आँखों में छुपा सकता है !
दर्द बन जाऊं तो गीतों में बदल सकता है !!
बनूँ मुस्कान तो होठों पे सजा सकता है !
बनूँ धड़कन तो अपने दिल में छुपा सकता है !!
गर बनूँ मोती गले मुझको लगा सकता है !
या बनूं फूल तो दामन से लगा सकता है !!
बन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
जानती हूँ मुझे तू दिल से लगा सकता है !!
मेरे हमराज ! मेरे दोस्त ! तेरे इक होने से !
मेरे जीवन का हर अंदाज बदल सकता है !!
ग़ज़ब है पूनम जी,ग़ज़ब
जवाब देंहटाएंमेरे हमराज ! मेरे दोस्त ! तेरे इक होने से !
जवाब देंहटाएंमेरे जीवन का हर अंदाज बदल सकता है !!
ये दो लाइन बेहतरीन हैं बाकि पूरी नज़्म बहुत खूबसूरत !
क्या कहने, आपकी हर एक line बहुत ही लाजवाब हैं पूनम जी
जवाब देंहटाएं(आपका मेरे ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन;
एक प्यार भरा अनुरोध)
बन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
जवाब देंहटाएंजानती हूँ मुझे तू दिल से लगा सकता है !!
वाह!
कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
जवाब देंहटाएंधन्यवाद!
बहुत अच्छे पूनम जी बढ़िया हैं शेर......चौथे शेर में कुछ कमी सी लगी|
जवाब देंहटाएंबन गयी खुशबू तो तू खुद भी महक सकता है !
जवाब देंहटाएंजानती हूँ मुझे तू दिल से लगा सकता है !!
दिल को छूने वाला शेर पूनम जी ..सारी गज़ल प्रेम को बयां करती है !
वाह वाह हर शेर खुबसूरत शेर दाद को मुहताज नहीं , बहुत खूब ....
जवाब देंहटाएंमेरे हमराज ! मेरे दोस्त ! तेरे इक होने से !
जवाब देंहटाएंमेरे जीवन का हर अंदाज बदल सकता है !!बिलकुल सही.....एक शख्स का साथ जीवन को क्या से क्या बना देता है.
वाह! बेहद खूबसूरत...
जवाब देंहटाएंसादर बधाई....
वाह ………बहुत ही खूबसूरत अशरार्।
जवाब देंहटाएंwahh..
जवाब देंहटाएंbehtarin abhivykti...
खूबसूरत एहसास
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