
अजनबी है कोई फिर भी वो अपना लगता है !
उससे न जाने कौन सा,कैसा रिश्ता लगता है !!
दूर रह कर भी कोई आस-पास लगता है !
मुझमें ही रहते हुए मुझसे जुदा लगता है !!
चलते-चलते मेरे कानों में कुछ कह जाता है !
सोते - सोते मुझे चुपके से जगा जाता है !!
हँसते - हँसते मेरी आँखों में वो बस जाता है !
दिल में धड़कन की तरह छुप के उतर जाता है !!
मैं हूँ, बस मैं हूँ, कोई साथ नहीं है मेरे !
मेरी तन्हाई है, एहसास हैं हमदम मेरे !!
मैं हूँ, बस मैं हूँ, कोई साथ नहीं है मेरे !
जवाब देंहटाएंमेरी तन्हाई है, एहसास हैं हमदम मेरे !!
sundar...
www.poeticprakash.com
आपकी कविता पढ़कर एक फ़िल्मी गाना याद आ गया.गाना है:-
जवाब देंहटाएंजब भी ये दिल उदास होता है.
जाने कौन आस पास होता है.
बहुत खूबसूरत अशआर |
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर, बधाई.
जवाब देंहटाएंपधारें मेरे ब्लॉग पर भी, आभारी होऊंगा.
हँसते - हँसते मेरी आँखों में वो बस जाता है !
जवाब देंहटाएंदिल में धड़कन की तरह छुप के उतर जाता है !!
वाह!
बहुत अच्छी कविता।
जवाब देंहटाएंवाह! बहुत सुन्दर रचना....
जवाब देंहटाएंसादर.
बहुत सुन्दर, बधाई
जवाब देंहटाएंचलते-चलते मेरे कानों में कुछ कह जाता है !
जवाब देंहटाएंसोते - सोते मुझे चुपके से जगा जाता है !!
हँसते - हँसते मेरी आँखों में वो बस जाता है !
दिल में धड़कन की तरह छुप के उतर जाता है !!
वाह क्या इकरार है पूनम जी बहुत खूब !
मैं हूँ, बस मैं हूँ, कोई साथ नहीं है मेरे !
जवाब देंहटाएंमेरी तन्हाई है, एहसास हैं हमदम मेरे !!
...
एक अटल सच्चाई है ...जो खुद के साथ नहीं वो किसी और के साथ क्या होगा.
बहुत सुंदर भाव पूनम जी.
बेहद खुबसूरत.
जवाब देंहटाएंमैं हूँ, बस मैं हूँ, कोई साथ नहीं है मेरे !
जवाब देंहटाएंमेरी तन्हाई है, एहसास हैं हमदम मेरे !!
वह बेहतरीन ......कविता ....
बहुत खूब ... हर शेर लाजवाब है ...
जवाब देंहटाएंमैं हूँ, बस मैं हूँ, कोई साथ नहीं है मेरे !
जवाब देंहटाएंमेरी तन्हाई है, एहसास हैं हमदम मेरे !!
बहुत उम्दा लिखा हैं आपने ..
परिचय करवाने के लिए आपका आभार
आपका मेरे ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन
प्लीज़ join my blog
ये तन्हाइयों के एहसास ही अपने लगाने लगते हैं
जवाब देंहटाएं