रौशन-ए-गुल हो तेरे आने से तो क्या
बात है...
हो वही बात ...थी जो तेरे साथ तो
...क्या बात है..!
तेरी एक मुस्कुराह्ट पर ही मर मिटे थे
हम...
तू जो मुस्कुराये कभी फिर से तो क्या
बात है...!
तू रहता है हरदम साये की तरह मेरे साथ
जिस्म तेरा न भी हो मेरे साथ तो क्या
बात है..!
वो कहता तो था खुद को कभी तकदीर
मेरी...
बन गया खुद ही वो तस्वीर तो क्या बात
है...!



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