मंगलवार, 24 जुलाई 2012
शुक्रवार, 20 जुलाई 2012
बस एक ख्वाब.....
आसमां लगे भरा-भरा कुछ इस तरह उडाएं....!
कभी खींच कर एक बादल का टुकड़ा
अपने घर की किसी दीवार पे सजाएं....!
कभी खोल दे खिड़कियाँ सारी घर की
फलक से धनक को ज़मीन पर उतारें....!
पहन कर कभी धानी चूनर तुम्हारी
छनन छन,छनन अपनी पायल बजाये...!
वो उड़ता सा आँचल,वो बिखरी सी जुल्फ़ें
वो गुनगुन सी बदरी,वो रिमझिम फुहारें...!
वो गालों की लाली,वो माथे के बिंदिया
इन आँखों में काजल सा तुमको सजाएं...!
सोमवार, 18 जून 2012
बादल पहली बारिश का.......
उड़ता हुआ एक छोटा सा बादल
धीरे से नीचे उतर आया
जब मेरे गालों को छुआ उसने
तो एहसास हुआ मुझे कि..
वो मेरे करीब है...!
घबरा के मैंने आस-पास देखा
फिर देखा आसमान में
उसके जैसे न जाने
कितने नटखट बादल
हंस रहे थे मुझ पर,
मेरी हैरानी पर....!
एक ने आँखें झपकायीं,
एक ने मुंह को गोल किया
और एक सीटी मारी.....
तो ढेर सारी बूँदें टपक पड़ी
खिलखिलाकर मुझ पर
मैं तो बस सराबोर ही हो गई.....!
बाकी सब हंस-हंस कर
लोटपोट हो गए
मेरी इस बेचारगी पर !
मैंने आँख तरेरी
और उस छोटे से
बादल को धर दबोचा...
वह पहले तो कसमसाया
फिर मुस्कराता हुआ
मेरे हाथों से फिसल कर
अपने साथियों से जा मिला
आसमान में......!
बुधवार, 6 जून 2012
मेरी दीद मुकम्मल कर दो.....
है आजकल ये मेरा दिल यूं बेकरार बहुत
करार देके मुझे बेकरार तुम कर दो....
तेरे बिना मैं अधूरी ,है अधूरी ये गजल
कुछ लफ्ज देके गजल मेरी मुकम्मल कर दो....
तुम्हारे इश्क़ की गिरफ्त में है दिल
मेरा
तुम मुस्कुराके देख लो मुझे
आज़ाद कर दो....
आज की रात चाँद ने की है रौशनी मध्यम
तुम अपने नूर से ये
रात चाँदनी कर दो....
कब से बेताब हूँ इक तेरी झलक पाने को
छत पे आ जाओ मेरी दीद मुकम्मल कर दो.....
रविवार, 3 जून 2012
एक मीठा सा एहसास.....
एक मीठा सा एहसास.....
किसी के होने का...
किसी के चाहने का ,
किसी के आने का...
किसी के जाने का,
किसी के छूने का...
किसी को छू जाने का,
किसी को बुलाने का...
किसी के पास जाने का,
किसी के रूठने का...
किसी के मनाने का ,
किसी को भुलाने का...
किसी को भूल जाने का,
किसी के याद आने पर...
यूं ही मुस्कुराने का...
कौन है वो.......???
गुरुवार, 31 मई 2012
बुधवार, 30 मई 2012

१३ मई..........
पूज्य श्री श्रीरविशंकर जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष में...
गुरुजी के श्री चरणों में समर्पित कुछ पुष्प...
गुरु..............
जीवन में जब गुरु मिले
पकड़ लीजिये हाथ !
सांस सांस में राम रहे
कभी न छोड़े हाथ !!
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गुरु मुझको ऐसा मिला
सोये जागे साथ !
जब कभी भी ठोकर लगे
मेरा पकड़ा हाथ !!
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गुरु मुझको ऐसा मिला
मोहन सूरत जिसकी !
आँख मूँद दर्शन करून
मन में पाऊँ झाँकी !!
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सांवरिया मेरो गुरु
मन में लियो बसाय !
आँख मूँद दरसन करूँ
करूँ प्रेम चित लाय !!
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बलिहारी तेरी गुरु
मन में कियो निवास !
यह सरीर मंदिर भयो
सांस-सांस में आस !!
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गुरु मेरा खुशबू हुआ
तन-मन में बस जाय !
कहाँ गुरु कहाँ स्वयं हूँ
अंतर किया न जाय !!

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