है आजकल ये मेरा दिल यूं बेकरार बहुत
करार देके मुझे बेकरार तुम कर दो....
तेरे बिना मैं अधूरी ,है अधूरी ये गजल
कुछ लफ्ज देके गजल मेरी मुकम्मल कर दो....
तुम्हारे इश्क़ की गिरफ्त में है दिल
मेरा
तुम मुस्कुराके देख लो मुझे
आज़ाद कर दो....
आज की रात चाँद ने की है रौशनी मध्यम
तुम अपने नूर से ये
रात चाँदनी कर दो....
कब से बेताब हूँ इक तेरी झलक पाने को
छत पे आ जाओ मेरी दीद मुकम्मल कर दो.....







