सोमवार, 13 अगस्त 2012
शुक्रवार, 10 अगस्त 2012
Oscar Wilde.............
Today,I want to share these lines...
With Someone,Sometimes,Somewhere...it's true...
Yet each man kills the thing he loves,
By each let this be heard,
Some do it with a bitter look,
Some with a flattering word,
The coward does it with a kiss,
The brave man with a sword!
Some kill their love when they are young,
And some when they are old;
Some strangle with the hands of Lust,
Some with the hands of Gold:
The kindest use a knife, because
The dead so soon grow cold.
Some love too little, some too long,
Some sell, and others buy;
Some do the deed with many tears,
And some without a sigh:
For each man kills the thing he loves,
Yet each man does not die.”
.......................
― Oscar Wilde
रविवार, 5 अगस्त 2012
आगे आगे देखिये होता है क्या ....
इक नशा सा छा रहा है इन दिनों....!
दिल को कोई भा रहा है इन दिनों..!
दिल को कोई भा रहा है इन दिनों..!
गा रहा था कल जो उल्फत पर गज़ल...
खुद में डूबा जा रहा है इन दिनों...!
खुद में डूबा जा रहा है इन दिनों...!
प्यार में डूबी हुई वो इक निग़ह...
दिल मचलता जा रहा है इन दिनों...!
दिल मचलता जा रहा है इन दिनों...!
तेरी सूरत में न जाने क्या मिला..
वो परेशां हो रहा है इन दिनों...!
वो परेशां हो रहा है इन दिनों...!
पास मेरे आये तुम कुछ इस तरह..
चाँद भी शरमा रहा है इन दिनों...!
चाँद भी शरमा रहा है इन दिनों...!
आगे आगे देखिये होता है क्या..
तारे दिन में गिन रहा है इन दिनों...!
तारे दिन में गिन रहा है इन दिनों...!
***पूनम***
5 अगस्त,2012
5 अगस्त,2012
शुक्रवार, 3 अगस्त 2012
मंगलवार, 24 जुलाई 2012
शुक्रवार, 20 जुलाई 2012
बस एक ख्वाब.....
आसमां लगे भरा-भरा कुछ इस तरह उडाएं....!
कभी खींच कर एक बादल का टुकड़ा
अपने घर की किसी दीवार पे सजाएं....!
कभी खोल दे खिड़कियाँ सारी घर की
फलक से धनक को ज़मीन पर उतारें....!
पहन कर कभी धानी चूनर तुम्हारी
छनन छन,छनन अपनी पायल बजाये...!
वो उड़ता सा आँचल,वो बिखरी सी जुल्फ़ें
वो गुनगुन सी बदरी,वो रिमझिम फुहारें...!
वो गालों की लाली,वो माथे के बिंदिया
इन आँखों में काजल सा तुमको सजाएं...!
सोमवार, 18 जून 2012
बादल पहली बारिश का.......
उड़ता हुआ एक छोटा सा बादल
धीरे से नीचे उतर आया
जब मेरे गालों को छुआ उसने
तो एहसास हुआ मुझे कि..
वो मेरे करीब है...!
घबरा के मैंने आस-पास देखा
फिर देखा आसमान में
उसके जैसे न जाने
कितने नटखट बादल
हंस रहे थे मुझ पर,
मेरी हैरानी पर....!
एक ने आँखें झपकायीं,
एक ने मुंह को गोल किया
और एक सीटी मारी.....
तो ढेर सारी बूँदें टपक पड़ी
खिलखिलाकर मुझ पर
मैं तो बस सराबोर ही हो गई.....!
बाकी सब हंस-हंस कर
लोटपोट हो गए
मेरी इस बेचारगी पर !
मैंने आँख तरेरी
और उस छोटे से
बादल को धर दबोचा...
वह पहले तो कसमसाया
फिर मुस्कराता हुआ
मेरे हाथों से फिसल कर
अपने साथियों से जा मिला
आसमान में......!
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