शुक्रवार, 18 मई 2012

रिश्ता.....







रिश्तों के बीच का बर्फीलापन..... 
cold wave बड़ी मुश्किल से थमता है,
इनके बीच का feeling अगर जम गया तो... 
वो कहाँ आसानी से गलता है !
रिश्तों की बर्फ बन चुकी उष्णता 
पिघलने में बड़ा समय लेती है,
ये पिघलती नहीं आसानी से...
कभी कभी पूरी जिंदगी ही बीत जाती है !
तो गुजारिश है ऐ मेरे दोस्तों........
अपने रिश्तों की....
गुनगुनी गरमाहट को बना के रखिए !
कुछ भी हो जाए....
इन रिश्तों में प्यार सजा के रखिए !
न जमने दीजिये अपनेपन की गर्मी को 
पत्थर से ठंडे ग्लेशियर के रूप में.....
तकरार को हल्के-फुक्ले स्नैक्स की तरह ही रखिए 
बस...कड़वाहट को मत लाइये अपने बीच में !
कभी किसी तीसरे को...
अपने रिश्तों के बीच में आने न दीजिये , 
न ही पैर पसारने दीजिये... 
एक शाश्वत मौन को अपने सम्बन्धों में !
अहं के परिंदे को पर भी न मारने दीजिये...!!
और एक-दूसरे के सम्मान को बना के रखिए....!!
इति शुभं...........

शनिवार, 12 मई 2012





पूज्य गुरुजी......
श्री श्री रविशंकर जी के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई ......




मैं क्या हूँ ....
कुछ भी तो नहीं
जो हूँ.....
बस तुम हो !
तुम कहते हो मुझसे...
और तुम ही सुनते हो  !
तुम ही हँसते हो मुझमें...
और तुम ही रोते भी हो !
जब खिलखिलाती हूँ मैं 
सुबह की धूप से खिल जाते हो,
मेरे ही चारों तरफ....!
दूर जाती भी हूँ कभी तुमसे जो मैं
मुझे फिर वापस ले आते हो,
तुम अपनी ही तरफ...!
मेरी आँखों की चमक में 
बसे रहते हो तुम हर वक़्त !
मुस्कराहटों में भी...
छिपे रहते हो तुम हर वक़्त !
गुनगुनाती हूँ जब भी....
बांसुरी से बज उठते हो !
मेरे गीतों में.....
मेरे साथ -साथ गाते हो !
प्रार्थनाओं में मेरी....
तुम ही तो मुसकुराते हो....!!

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

जुस्तजू..........








फलक पे चाँद-सितारे भी साथ देते हैं...
कभी तो हाथ बढ़ा कर उन्हें छुआ होता..!!


                                         जमीन है तो मयस्सर यहाँ  सभी के लिए...
                                         बस आसमान में चाहें तो घर नहीं होता..!!


अजीब शै है ये यारों गम-ए-मुहब्बत भी...
कि जितना लुत्फ है इसमें कहीं नहीं होता..!!


                                         तू मेरे साथ,मेरे पास यूं तो है हर वक़्त...
                                         मैं तेरे पास रहूँ  बस यही नहीं होता...!!


जानती हूँ,मानता है मुझे गजल अपनी...
गा सके मुझको तरन्नुम में ये नहीं होता..!!





रविवार, 15 अप्रैल 2012

तुम में 'मैं '.................




तुम मुझसे दूर थे कब...?
और जाओगे भी कहाँ...?
मेरी दो आँखें 
साथ रहती हैं तुम्हारे 
हरदम...
हर वक़्त !
मुझे दीखता है सब...!
तुम कहाँ, 
किस समय
क्या कर रहे हो...!
मुझे ये भी पता चल जाता है...
कि तुम क्या सोचते हो !
तुम्हारी हर बात तुमसे पहले
मुझे पता चल जाती है,
मेरी साँसें.....
तुम्हारी साँसों में घुल कर
साथ-साथ चलती हैं,
मेरी बाँहें तुम्हें ..
हर वक़्त घेरे रहती हैं,
मेरी ही थपकियाँ 
हर रात तुम्हें सुलाती हैं,
तुम चाह कर भी 
मुझसे दूर नहीं जा सकते
क्यूँ कि ....
मैं हर वक़्त,
हर जगह तुम्हारे साथ हूँ..
क्यूँ कि...
तुम मेरे हो...
और मैं...
तुम में 'मैं ' हूँ.....!


बुधवार, 11 अप्रैल 2012

मुझे पता है......





मुझे पता है
कि तुम क्या सोचते हो 
मेरे बारे में....!
मेरा तुमसे 
बेतकल्लुफ हो कर बात करना,
वो ज़रा-ज़रा सी बात पर
मेरा हँसना,खिलखिलाना,
तुम्हें चिढ़ाना और बेवजह ही
तुम पर गुस्सा करना..!
और तुम......
सब सुन कर भी 
कुछ नहीं कहते मुझे !
मुझे पता है.....
कि तुम मेरे बारे में 
क्या सोचते हो..
और मैं.....
बस इतना जानती हूँ
कि.....
तुम्हारे साथ उतनी देर के लिए
मैं  "मैं" होती हूँ
बस "मैं".......!!!

रविवार, 8 अप्रैल 2012

जिंदगी बिताने को.......




                                       जिंदगी बिताने को एक दर्द कम है मगर
                                       यूँ  ही  मर जाने को एक  प्यार काफी  है !


                                       तेरे दूर जाने की वजह कुछ होगी मगर
                                       तुझको पास लाने को एक याद काफी  है !


                                       यूँ तो आसमां में छा जाते हैं बादल  काले  
                                       बूँदें  बरसाने  को  एक  आँख  काफी  है !


                                       देखते हैं हम उनको अपनी बंद आँखों से
                                       मेरी इन आँखों को एक ख्वाब काफी है !


                                       होगी वफ़ा तेरी..कहीं,कभी,किसी के लिए
                                       मेरी तन्हाई  को तेरी  बेवफाई  काफी  है !







बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ये क्या दिया तू ने....






                                       जिंदगी के मायने बदल दिए तू ने 
                                       दिन  और  रात बदल  दिए तू  ने !
                                       रिश्ते-नाते, उसूल, रस्मों-रिवाज़
                                       दोस्ती के मायने बदल दिए तू ने !
                                       प्यार  में  दर्द तो  मुकम्मल  है 
                                       दर्द  हमदर्द  यूँ  दिया  तू   ने !
                                       तुझसे उम्मीद-ए-वफ़ा रखते थे 
                                       बेवफा  जाने  क्या दिया तू  ने ?  
                                       पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
                                       माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??