बुधवार, 11 अप्रैल 2012

मुझे पता है......





मुझे पता है
कि तुम क्या सोचते हो 
मेरे बारे में....!
मेरा तुमसे 
बेतकल्लुफ हो कर बात करना,
वो ज़रा-ज़रा सी बात पर
मेरा हँसना,खिलखिलाना,
तुम्हें चिढ़ाना और बेवजह ही
तुम पर गुस्सा करना..!
और तुम......
सब सुन कर भी 
कुछ नहीं कहते मुझे !
मुझे पता है.....
कि तुम मेरे बारे में 
क्या सोचते हो..
और मैं.....
बस इतना जानती हूँ
कि.....
तुम्हारे साथ उतनी देर के लिए
मैं  "मैं" होती हूँ
बस "मैं".......!!!

रविवार, 8 अप्रैल 2012

जिंदगी बिताने को.......




                                       जिंदगी बिताने को एक दर्द कम है मगर
                                       यूँ  ही  मर जाने को एक  प्यार काफी  है !


                                       तेरे दूर जाने की वजह कुछ होगी मगर
                                       तुझको पास लाने को एक याद काफी  है !


                                       यूँ तो आसमां में छा जाते हैं बादल  काले  
                                       बूँदें  बरसाने  को  एक  आँख  काफी  है !


                                       देखते हैं हम उनको अपनी बंद आँखों से
                                       मेरी इन आँखों को एक ख्वाब काफी है !


                                       होगी वफ़ा तेरी..कहीं,कभी,किसी के लिए
                                       मेरी तन्हाई  को तेरी  बेवफाई  काफी  है !







बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ये क्या दिया तू ने....






                                       जिंदगी के मायने बदल दिए तू ने 
                                       दिन  और  रात बदल  दिए तू  ने !
                                       रिश्ते-नाते, उसूल, रस्मों-रिवाज़
                                       दोस्ती के मायने बदल दिए तू ने !
                                       प्यार  में  दर्द तो  मुकम्मल  है 
                                       दर्द  हमदर्द  यूँ  दिया  तू   ने !
                                       तुझसे उम्मीद-ए-वफ़ा रखते थे 
                                       बेवफा  जाने  क्या दिया तू  ने ?  
                                       पूछता मुझको गर मिले ए खुदा
                                       माँगा था क्या ये क्या दिया तू ने...??

गुरुवार, 29 मार्च 2012

आईना.....


 


मैं हूँ आईना तुम्हारे.......
कल,आज और कल का
जिसमें तुम्हें नज़र आएगा
अपना बीता हुआ कल
साथ ही उससे जुडी स्मृतियाँ....
तुम क्या थे कल...?
और क्या ये सफ़र
तुमने अकेले ही तय किया ???
नहीं.....
न जाने कितने कदम थे 
उस सफ़र में साथ तुम्हारे..!
देख सको तो देखो....
अपना अक्स इसमें ,
बहुत कुछ कहता
नज़र आएगा ये आईना...!!
तुम्हारा आज भी
कल की ही प्रतिछाया है
तुम्हारे आज की
सारी संभावनाएं 
तुमने कल ही गढ़ डाली थीं.....
तुम्हारी आज की
परेशानियाँ,हैरानियाँ,
सुख,दुःख,प्रेम,अहम् 
सब कल की ही देन है !


देख सको तो देखो....
पर कितना समझोगे...
ये तुम जानो !
तुम्हारा आज हर कदम
कल होगा तुम्हारे साथ !
तुम्हारी आज की सोच,
तुम्हारा आज का हर क्षण,
तुम्हारे कल का निर्माण
करता जा रहा है साथ साथ !
तुम कल क्या होगे ...?
तुम भी नहीं जानते..!!
क्यूँ कि कल की ही तरह
तुम्हें अपने आज की भी
परवाह नहीं है अभी भी....!
तुम अपने लिए
जिम्मेदार रहे ही कब...!
तुम्हारे कल के लिए भी
दोषी कोई और था,
और तुम्हारे आने वाले 
कल के लिए भी
दोषी कोई और ही होगा !


इस  आईने में ...
जो अक्स उभरता है
तुम उससे हमेशा ही
नज़रें बचाते रहते हो....
क्यूंकि यह आईना
तुम्हारे सच को बयाँ
करता है तुम्हें ही...!
यह आईना तुमसे
तुम्हारी ही बातें करता है..
इसीलिए तुम...
खुद को देखने के लिए
बाहर अपनी ही परछाइयाँ
खोजते रहे हो अब तक !
ये परछाइयाँ तुम्हारे साथ
चलती तो है लेकिन...
इनका अपना अस्तित्व नहीं होता !
ये वही कहती हैं...
जो तुम कहते हो !
ये वही सुनती हैं...
जो तुम सुनाना चाहते हो !
मूक-बधिर ये परछाईयाँ
बस हाँ में हाँ मिलाना जानती हैं 
और थोड़ी दूर चल कर
ये साथ भी छोड़ देती हैं....
या फिर तुम ही 
कोई अपनी नई परछाई 
गढ़ लेते हो खुद.....!
लेकिन कब तक.....???


मैं आईना हूँ तुम्हारा
एक ऐसा मज़बूत आईना...
जो कल था,
जो आज है
और जो कल भी रहेगा...
तुम्हारे साथ,
तुम्हारे ही अक्स के साथ !
कुछ  न  बोलेगा तो भी
सब बातें करेगा तुमसे !
न कहेगा कुछ भी तो
मौन रह कर ही
सब कह देगा तुमसे !
तुम चाहो भी तो
कुछ नहीं कर सकते
क्योंकि....
इसको तोड़ना
तुम्हारे हाथ में नहीं है....!!

रविवार, 25 मार्च 2012

क्या कहा जाये......!!!




सेमल की रुई सा ये मन ,
कहीं दूर तक उड़ जाए !
पलाश के चटख रंगों सा,
मन बिखर-बिखर जाए !
हवा का झोंका धीरे से,
कानों में कुछ कह जाये !
इक ज़रा सी आहट भी,
तेरा एहसास दिला जाए !
और चाह कर भी तू न आये.....
तो बोलो......
क्या किया जाये.....???

बुधवार, 21 मार्च 2012

एक रिश्ता ऐसा ही.....






कुछ रिश्ते....
जो बेनामी होते हैं
जिन्दगी भर 
साथ -साथ चलते हैं !
शायद....
इसीलिए मैंने तुझसे
और खुद से भी  
एक ऐसा ही
रिश्ता बना लिया है...!!



मंगलवार, 13 मार्च 2012

वजूद ........







बिना रंगों के जो रंग चढ़ गया है
खुली आँखों से वो दिखता नहीं है !
तेरे न होने का संग  जो मज़ा  है
संग रह के भी वो मिलता नहीं है !

                                          महक फूलों की जो रच बस गयी है
                                          न जाऊं गर चमन में भी तो क्या है !
                                         चाँदनी  छा  गयी  है आज  हर  सू
                                         गगन में चाँद न निकला तो क्या है !

उठाती हूँ जब मैं आँखों को अपनी
बिखर जाती  यूँ  हर  सू रौशनी है !
अगर आ जाएँ आंसू भी पलक पर
मेरे  संग  सारी  दुनिया ही दुखी  है !

                                    ख़ुशी  मिलती  है तेरे संग रह  के
                                   अकेले रह के भी मुझको ख़ुशी है !
                                   सिहरती  हूँ  तेरे स्पर्श  से  मैं
                                   छुए न तू मुझे फिर भी ख़ुशी है !

अजब ये रंग  है इस दिल का यारों
किसी ने दे दिया सब मुझको यारों !
अब  तलक था रहा अलग  मुझसे
यूँ मिला मुझको मेरा वजूद यारों....!!