
भीगा मौन.....
बोलने वाले भी
जाने क्या-क्या बोल जाते हैं
कहना होता है कुछ
और कुछ और ही कह जाते है
जहाँ ज़रुरत होती है खामोशी की
वहां शब्दों को यूँ ही
व्यर्थ गँवाते हैं
और इस तरह वो...भावनाओं का गीलापन तक
महसूस नहीं कर पाते हैं
और फिर जिन्दगी भर
अपने में नहीं...
बाहर ही कुछ खोजते रह जाते हैं,
मौन में लिखे अक्षर भीगे ही होते हैं..!
ज़रुरत है उनका गीलापन महसूस करने की !
जिसे शायद बिरले ही समझ पाते हैं..!!
वर्ना बोल-बोल कर
शब्द अपना महत्त्व खोते जाते हैं..!!
बिलकुल सही कहा है आपने.....सहमत हूँ आपसे.......लाजवाब |
जवाब देंहटाएंजाने क्या-क्या बोल जाते हैं
जवाब देंहटाएंकहना होता है कुछ
और कुछ और ही कह जाते है
जहाँ ज़रुरत होती है खामोशी की
वहां शब्दों को यूँ ही
व्यर्थ गँवाते हैं
bahut khub likha hai aapne.....
पुनम जी
जवाब देंहटाएंसादर सस्नेहाभिवादन !
मौन में लिखे अक्षर भीगे ही होते है … !
ज़रुरत है उनका गीलापन महसूस करने की !
लगता है , बहुत जज़्बाती हैं आप भी !
घायल की गत घायल जाने … और न जाने कोय …
हृदय से आपको
बधाई और शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार