
तुम्हारे लिए......
वो तुम
जो मेरे साथ हो
मेरे पास हो,
हर समय
हर वक़्त,
मेरे भीतर
मेरे बाहर,
मेरे हर एहसास में..
मेरे प्यार में
मेरी खुशी में
मेरे गम में
मेरे आंसुओं में
मेरे हर ज़ज्बात में
क्या कहूं तुम्हें?
क्या नाम दूं तुम्हें ?
कौन हो तुम मेरे ?
कहना मुश्किल है ?
कोई और नहीं तुम...
मेरा हमसाया हो
बस.......!!
कोई और नहीं तुम...
जवाब देंहटाएंमेरा हमसाया हो
यह अहसास बना रहे ....अंतिम पंक्ति में जाकर कविता रहस्यमयी हो जाती है ....आपका आभार
वो तुम
जवाब देंहटाएंजो मेरे साथ हो
!!!!!!!!!!
आपकी कविताएं मन को छूने में कामयाब रहती हैं |
जवाब देंहटाएंबधाई और शुभकामनाएं |
हर एहसास में हो ..अब और क्या बचा ? अच्छी भावाभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंvaah punam ji kya baat hai
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार! खासकर अंतिम पंक्तियां
जवाब देंहटाएंकोई और नहीं तुम...
मेरा हमसाया हो
बस.......!!
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com
पूनम जी,
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर लगे ये भाव....शानदार.....मुझे लगा यहाँ 'मेरा हमसाया हो' की जगह 'कोई और नहीं तुम.....मेरा ही साया हो.....ज्यादा अच्छा लगता.....क्यों ?
behtrin rachna
जवाब देंहटाएंshaayad...!
जवाब देंहटाएं"bas..
ek tum ho
jo mera saya ho"
shukriya..
Imraan saheb !!
aur aap sabhi logon ka bhi shukriya...!!
बहुत सुन्दर नज़्म है पूनम जी..........
जवाब देंहटाएंबाकी भी जरुर पढूंगा, वक़्त मिलने पर.........
मेरे रचनाओं को अपना कीमती वक़्त देने का बहुत शुक्रिया.........आते रहिएगा....... :))
अहसासों का सुन्दर चित्रण..
जवाब देंहटाएंअपने अन्दर छुपे रहस्य को शब्दों में बंधना दुष्कर कार्य होता है, अपने खूबसूरती से किया है . आभार इस रहस्यवाद से प्रेरित रचना के लिए .
जवाब देंहटाएंमन कि आवाज़, अंतर्मन, आत्मा या फिर परमात्मा | नाम चाहे जो भी दें - मेरा हमसाया हो |
जवाब देंहटाएंa philosophical post..
जवाब देंहटाएंAise kuch rishton ka koi naam nahi hota ... gahre jajbaat ...
जवाब देंहटाएंआप सभी का आभार...!!
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